हापुड़। गन्ना समिति और इफको के नकद केंद्रों पर खाद का संकट छा गया है। आलू बुवाई की तैयारियों में जुटे किसान खाली गोदाम देखकर मायूस लौट रहे हैं। समितियों पर लंबी लाइनों में लगने के बावजूद किसानों को डीएपी आसानी से नहीं मिल रहा। कई समितियों पर भी देरी से उर्वरक पहुंच रहे हैं। जरूरत के समय उर्वरकों का संकट जिले में गहराया है।
आलू और गेहूं की बुवाई के दौरान डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। पिछले कई महीने उर्वरक की खास जरूरत नहीं थी, लेकिन अब आवश्यकता पड़ते ही जिले में डीएपी का संकट गहरा गया है। नकद केंद्रों पर भी डीएपी नहीं मिल रहा, इस कारण किसानों को हापुड़ ही नहीं दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बता दें कि जुलाई, अगस्त महीने में यूरिया की आवश्यकता सबसे अधिक किसानों को होती है। लेकिन उस समय भी यूरिया का संकट गहराता है। यही कारण है कि बाजार में घटिया और मिलावटी उर्वरकों के कारोबार को जगह मिल जाती है।
सीन नंबर एक, गन्ना समिति हापुड़
हापुड़ गन्ना समिति के गोदाम में डीएपी नहीं पहुंची। यहां किसान जानकारी करने पहुंच रहे थे। लेकिन कार्यालय प्रभारी का कहना था कि फिलहाल डीएपी नहीं है, कब आएगी इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में किसान मायूस होकर वापस लौट रहे थे।
सीन नंबर दो, इफको केंद्र-
नवीन कृषि मंडी स्थित इफको केंद्र के गोदाम में भी डीएपी नहीं था। पूरा गोदाम खाली पड़ा था, धान बिक्री करने के बाद सबसे ज्यादा किसान इसी केंद्र से उर्वरकों की खरीद करते हैं। लेकिन बताया गया कि यहां भी डीएपी काफी दिनों से नहीं आयी है। किसान बाहर इंतजार भी कर रहे थे, लेकिन राहत नहीं मिल सकी।
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गन्ना समिति पर नोटिस चस्पा, सिर्फ दो दिन मिलेगा उर्वरक-
नवीन कृषि मंडी स्थित गन्ना समिति के खाद गोदाम पर नोटिस चस्पा किया गया है। इसमें लिखा है कि किसानों को गोदाम से सप्ताह में सिर्फ दो ही दिन मंगलवार और बृहस्पतिवार को खाद मिलेगा। बता दें कि इस गोदाम पर हमेशा ही उर्वरकों की कमी बनी रहती है।
कोट -
सहकारी समिति और गन्ना समिति पर डीएपी की कमी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। लगातार सप्लाई दी जा रही है, साथ ही नकद केंद्र संचालकों को भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। - गौरव प्रकाश, जिला कृषि अधिकारी।