क्या था मामला
कपूरपुर थाना क्षेत्र के गांव सपनावत में कर्जं में डूबे मजदूर संजय उर्फ टीटू (50) ने पत्नी प्रेमवती (45) व नाबालिग बेटी के साथ जहरीला पदार्थ खा लिया था। तीनों की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पिता का रविवार को जबकि मां व बेटी का सोमवार शाम पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि संजय ने निजी फाइनेंस कंपनी और गांव के ही कुछ लोगों से कर्ज लिया था। सूदखोर और फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी हर दिन उनके घर पहुंचकर परिवार को किस्त चुकाने के लिए परेशान कर रहे थे। दो दिन पहले ही कंपनी के कर्मचारी उनके पुत्र को बंधक बनाकर ले गए थे और किस्त देने के आश्वासन पर चार घंटे बाद उसे छोड़ा था।
पिता को फोन कर बताया था, घर पर बैठे हैं एजेंट
मामले में मंगलवार को मृतक संजय के पुत्र रिंकू ने खुलासा करते हुए बताया कि बंधक बनाने के दौरान फाइनेंस कंपनी के एजेंटों ने दो दिन का समय दिया था। तब उसने उनकी पिता और चाचा से बात कराई थी। पिता ने आश्वासन दिया था कि 31 अगस्त को वे अपनी ससुराल से किस्त के 10,300 रुपये का इंतजाम कर लौंटेंगे। आश्वासन के बाद ही एजेंटों ने उसे घर जाने दिया था। तय तिथि के अनुसार शनिवार शाम को कंपनी के दो एजेंट उसके चाचा पवन के घर पहुंच गए। जिसकी जानकारी उसने फोन कर पिता संजय कुमार को दी थी। लेकिन रुपयों का इंतजाम न हो पाने के कारण पिता शायद अधिक तनाव में आ गए और सभी ने जहर खाने का निर्णय ले लिया। जिस समय पिता मां और उसकी बहन घर आए, तो एजेंट घर पर ही मौजूद थे। लेकिन जैसे ही उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई, दोनों बाइक लेकर फरार हो गए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई जहर से मौत की पुष्टि
मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीनों की जहर खाने से मौत की पुष्टि हुई है। इस संबंध में परिजनों से बात की गई है। हालांकि शाम तक परिजनों की ओर से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। -विनीत भटनागर, एएसपी।
बकाया के कारण कटा हुआ है बिजली कनेक्शन
संजय और उसके परिवार पर कर्ज का बोझ इतना अधिक बढ़ गया था कि वह बिजली का बिल तक जमा नहीं कर पा रहे थे। 20 हजार से अधिक का बकाया होने के कारण ऊर्जा निगम ने करीब एक माह पहले उनके घर का कनेक्शन काट दिया था। इस कारण भाई रामकुमार का परिवार भी अंधेरे में रह रहा था।
तहसील की टीम गांव में कर रही पूछताछ
पीड़ित परिवार की प्रशासनिक स्तर से मदद की जा सके, इसके लिए क्षेत्र के लेखपाल पीड़ित परिवार और गांव में जानकारी कर रहे हैं। मामले में एसडीएम लवी त्रिपाठी का कहना है कि दोनों बच्चों के बयान दर्ज किए गए हैं। तहसील स्तर से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जिसे डीएम को सौंपा जाएगा।
मोटे ब्याज के ऊपर लग रही थी पेनेल्टी
फाइनेंस कंपनियों का खेल क्षेत्र में बड़े स्तर पर चल रहा है। पीड़ित परिवार ने जिस फाइनेंस कंपनी से 28 प्रतिशत की दर से तीन लाख का कर्ज लिया था, उसे अपना छह लाख की कीमत का मकान गिरवी रखा था। इसके बाद 10300 रुपये प्रतिमाह की किस्त पांच साल के लिए बंधी थी, लेकिन किस्त न देने पर प्रतिदिन करीब 1100 रुपये की पेनेल्टी लगाई जा रही थी। ऐसे में पीड़ित परिवार पर दोहरी मार पड़ रही थी और वह कर्ज लेने के खेल में फंस चुके थे। वहीं, मामले में मृतक के छोटे भाई पवन ने प्रशासन से परिवार की आर्थिक मदद की मांग की है।