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प्रदर्शन नहीं, आत्मदर्शन से ही होगा सच्चा नारी-सशक्तिकरण : डाॅ. सर्वेश्वर

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स्वर्ग आश्रम रोड पर राम कथा सुनाते डॉ सर्वेश्वर। संवाद
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हापुड़। कथावाचक डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि अक्सर कुछ बुद्धिजीवी लोग अहिल्या प्रसंग के संदर्भ में कहते हैं कि भारतीय संस्कृति तो नारी विरोधी है। जहां एक नारी को पुरुष-प्रधान समाज बिना उसकी गलती के दंड दिया गया। लेकिन ऐसे लोग ये भूल जाते हैं कि संपूर्ण विश्व में यदि किसी संस्कृति में नारी की पूजा होती है तो वह केवल मात्र भारतीय संस्कृति ही है।
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उक्त प्रवचन डाॅ. सवेश्वर ने स्वर्ग आश्रम रोड पर अर्जुन नगर के सामने आयोजित श्री राम कथा में मंगलवार को व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि भारत में तो वैदिक काल से ही ऋषियों ने नारी की महिमा को गाया। साथ ही आत्म दर्शन की सनातन विद्या ब्रह्मज्ञान प्रदान कर नारी की सुप्त ब्रह्म शक्ति को भी जगाया। यहीं प्रक्रिया तो अहल्या प्रसंग में भी घटित हुई थी। गौतम ऋषि ने अहिल्या को ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर ध्यान की स्थिर व अचल अवस्था में शिलावत बैठने की प्रविधि दी, जिससे ब्रह्म साधना के ओज में उसकी सुंदरता पवित्रता की धवलता से चमक उठे और जगत उसके निष्कलंक आचरण के आगे नतमस्तक हो जाए।
कथा में विधायक विजयपाल आढ़ती, एसपी ज्ञानंजय सिंह, दीपक अग्रवाल, सुधांशु माहेश्वरी, स्वामी नरेशानंद, साध्वी श्वेता भारती, साध्वी ज्योति भारती आदि भी शामिल रहे।
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