हापुड़। गढ़ रोड स्थित ततारपुर के पास काली नदी पर बन रहा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मथुरा मॉडल पर कार्य करेगा, जो मेरठ मंडल के लिए भी नजीर बनेगा। यहां, काली नदी के जहरीले पानी को शुद्ध करने के बाद पानी रिफाइनरी और कूलिंग टावरों को बिक्री किया जाएगा। इस पैसे से न सिर्फ संस्था सशक्त होगी, बल्कि मरम्मत और बिजली खर्च भी पानी से निकल सकेंगे।
मेरठ मंडल के कई जिलों से होते हुए काली नदी हापुड़ के ततारपुर बाईपास के पास से गुजर रही है, जो आगे चलकर गंगा में मिलती है। नमामि गंगा योजना का उद्देश्य गंगा नदी को निर्मल बनाना है, लेकिन इसके लिए दूषित पानी को इसमें विलय होने से रोकना भी चुनौती है। इसी क्रम में यूपी सिडको को ततारपुर बाईपास के पास काली नदी पर एसटीपी बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्लांट बनाने का कार्य जोरों पर है, पिछले दिनों हापुड़ जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने मथुरा मॉडल की चर्चा की। मथुरा में इसी तरह के प्लांट से पानी कूलिंग टावर और रिफाइनरियों को बिक्री किया जाता है। ऐसे में टावरों के लिए भूगर्भ जल दोहन तो रुकता ही है, साथ ही प्लांट की मरम्मत और इन्हें चलाने के लिए भी अच्छा खासा राजस्व मिल जाता है।
इस मॉडल को हापुड़ में भी लागू करने की सहमति बनी है। एक प्रतिनिधिमंडल रिफाइनरी, कूलिंग टावर व औद्योगिक इकाइयों से संपर्क कर, अनुबंध स्थापित करेगा। इसके अलावा जो पानी बचता है, उसे खेतों की सिंचाई के प्रयोग में लाया जाएगा। बाकी शुद्ध पानी गंगा में विलय होगा।
काली नदी में बह रहा जहरीला पानी
काली नदी का उद्गम मुजफ्फरनगर की खतौली तहसील के अंतवाड़ा गांव से होता है, जो मेरठ, हापुड़ होते हुए कन्नौज के पास गंगा में मिलती है। इस नदी के किनारे औद्योगिक इकाई, चीनी मिले हैं जिनका दूषित पानी सीधे नदी में ही गिरता है। हापुड़ में नदी किनारे बसे मुदाफरा, गोहरा, बिगास, कनिया समेत दर्जनों गांवों का भूगर्भ जल भी दूषित हो चुका है। इन गांवों में सबसे अधिक हेपेटाइटिस और कैंसर के रोगी हैं। यही पानी अभी तक गंगा में मिलता है। हालांकि एसटीपी के बनने से गंगा में जहरीला पानी विलय होने से रुकेगा।
410 किलोवाट का कनेक्शन स्वीकृत, बनेगा स्वतंत्र फीडर
एसटीपी के लिए स्वर्ग आश्रम रोड बिजलीघर से स्वतंत्र फीडर बनाया जा रहा है। प्लांट के लिए 410 किलोवाट का कनेक्शन स्वीकृत हो गया है। खंभे लगाने का कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है। जल्द ही प्लांट तक निर्बाध बिजली पहुंचेगी।
मथुरा मॉडल पर तैयार हो रहा प्लांट
सहायक अभियंता, नमामि गंगा योजना खेमकरण शर्मा का कहना है कि एसटीपी का निर्माण कार्य अब जल्द ही पूरा हो जाएगा। मथुरा में जिस तरह प्लांट कार्य कर रहा है, हापुड़ में भी इसी तरह प्लांट चलाने की तैयारी है। विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है।