जिले में तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। डेंगू के मरीजों की पुष्टि निजी अस्पतालों की ओर से की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने तीनों मरीजों का सैंपल लेकर एलाइजा टेस्ट के लिए मेरठ मेडिकल भेज दिया है। विभागीय रिकॉर्ड में इस वर्ष केवल एक मरीज को डेंगू की पुष्टि की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने निजी चिकित्सकों को डेंगू की पुष्टि अपने स्तर से न करने की चेतावनी दी थी। इसी के चलते इन दिनों निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीज तो बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सक उनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को नगर के निजी अस्पताल में न्यू शिवपुरी निवासी अभिषेक, लुखलाड़ा निवासी विधि, अब्दुल्लापुर मोडी निवासी उमैर में डेंगू की पुष्टि की गई है। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को मिली तो हड़कंप मच गया।
आनन फानन में उन्होंने निजी चिकित्सकों को मरीजों के सैंपल एकत्र कर उन्हें सौंपने के निर्देश दिए। तीनों मरीजों के सैंपल एकत्र कर विभागीय अफसरों ने एलाइजा जांच के लिए मेरठ मेडिकल भेज दिया है। अफसर मेडिकल लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज की स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं।
जिले के निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की भरमार है। प्राइवेट लैब की जांच रिपोर्ट में अनेक मरीजों में एनएस-1 पॉजीटिव पाया जा रहा है, जो डेंगू की श्रेणी में आता है। स्वास्थ्य विभाग के कड़े निर्देशों के चलते चिकित्सक रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बच रहे हैं।
गढ़ रोड स्थित सीएचसी के सूत्रों की मानें तो वहां भी रोजाना डेंगू से पीड़ित आधा दर्जन मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन अफसरों के डर से मरीजों को वायरल बुखार बता दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को इलाज में बेहद परेशानी होती है।
प्राइवेट लैब पर भी मरीजों के सैंपल जांच के लिए अभिभावकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
सीएमओ डा. एके सिंह का कहना है कि जिन मरीजों में डेंगू की पुष्टि की गई है, उनके सैंपल जांच के लिए मेरठ मेडिकल भेजे गए हैं। वहां से जो जांच रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर स्पष्ट हो सकेगा।