काली नदी के दूषित पानी से प्रभावित 20 गांवों में जल्द ही पाइपलाइन पेयजल की सप्लाई की जाएगी। जल निगम ने इसकी कार्ययोजना बनाकर शासन को भेज दी है। अब धनराशि आवंटन होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
इससे लोगों को शुद्ध जलापूर्ति मिल सकेगी। इन गांवों में एक दशक में सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मेरठ से निकलकर कन्नौज में गंगा में मिलने वाली काली नदी से आसपास के गांवों का भूजल दूषित हो गया है।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि काली नदी से सटे कई गांवों में 10 साल में हैपेटाइटिस आदि बीमारियों के चलते सैकड़ों ग्रामीण अपनी जान गंवा बैठे हैं। कई गांवों के लोग अभी भी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
जल निगम के अधिकारियों की माने तो जिले में काली नदी के किनारे 46 गांव बसे हैं जिनका ग्राउंड वाटर पीने लायक नहीं है। इसके चलते 26 गांवों में पहले ही पाइपलाइन वाटर सप्लाई का काम शुरू हो चुका है।
बाकी 20 गांवों में पाइपलाइन सप्लाई के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके लिए धन मांगा गया है। इससे दूषित जल से ग्रामीणों को निजात मिल सके।
ततारपुर, पटना, हबिसपुर बिगास, लालपुर, सिकंदरपुर काकौड़ी, भमैड़ा, छतनौरा, सलोनी सहित कुल बीस गांवों में वाटर सप्लाई को पाइपलाइन और ओवरहेड टैंक बनाने का प्रस्ताव है। इन गांवों में आबादी के अनुसार बजट बनाया गया है। कुल मिलाकर 20 करोड़ से ज्यादा का काम उक्त गांवों में किया जाना है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता एसके जैन का कहना है कि शासन को बीस गांवों में टंकी बनाने और पानी के लिये पाइप लाइन की कार्य योजना बनाकर भेज दी गई है। जल्द ही शासन से हरी झंडी मिलने पर गांवों में काम शुरू करा दिया जायेगा।