गढ़ रोड पर करोड़ों रुपये की जमीन से बना नगर पालिका का एक मात्र अस्पताल इन दिनों सिर्फ कागजों में ही दौड़ रहा है। तीन दशक पहले तक इस अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ होती थी।
अब राजनीतिक पेंच व अव्यवस्थाओं के चलते शहरवासी इस अस्पताल को भूल चुके हैं। यहां मरीजों को इलाज, दवा तो दूर अब घुसने तक नहीं दिया जाता है, गुमराह करने के लिए न तो अस्पताल का कोई बोर्ड है और न ही कोई चिकित्सक की प्लेट है।
इन दिनों शहर बुखार से तप रहा है। निजी और सरकारी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की भरमार है। नगर पालिका साफ सफाई, फॉगिंग आदि कराने का दम भरती रहती है।
इसके जिम्मेदार अफसर एक बार भी विचार नहीं करते कि नगर पालिका का एक मात्र अस्पताल किन हालातों से गुजर रहा है। करोड़ों रुपये की जमीन पर शहर के बीचों बीच नगर पालिका का अस्पताल है।
यह अस्पताल कई दशकों से सेवा दे रहा था, लेकिन कुछ साल से राजनीतिक पेच व अव्यवस्थाओं के चलते यह सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। आलम यह है कि अधिकांश शहरवासी यह भी भूल चुके हैं कि नगर पालिका का भी कोई अस्पताल शहर में है।
इसका कारण यह है कि न तो अस्पताल का कोई बोर्ड लगा हुआ है और न ही बिल्डिंग में डॉक्टर की प्लेट लगी है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक बाइक मिस्त्री ने जरूर अपना बोर्ड टांग रखा है।
इस मामले में अब पूर्व उपाध्यक्ष किशन बाटला ने डीएम से शिकायत कर जांच कराने की गुहार लगाई है। डीएम ने जांच कराकर अस्पताल शुरू कराने का आश्वासन दिया है।
नगर पालिका अध्यक्षा मालती भारती का कहना है कि यह मामला जानकारी में आया है। इस अस्पताल का वह स्वयं निरीक्षण करेंगी। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।