बहादुरगढ़ थानाक्षेत्र के गांव पूठ के पास गंगा किनारे भारी मशीनों से हो रहे बालू के अवैध खनन का मामला एनजीटी में पहुंच गया है। इससे पर्यावरण, जलीय जीवों को हो रहे नुकसान के संबंध में पर्यावरणविद व जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने यह मामला दर्ज कराया है।
उन्होंने बताया कि गांव पूठ में गंगा किनारे भारी मशीनों के द्वारा लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है। पुलिस, प्रशासन की मिलीभगत से खनन कराने वाले माफियाओं ने सभी गाइडलाइन को किनारे कर दिया है।
मनमाने तरीके से भारी मशीनों से गंगा किनारे गहराई तक खनन किया जा रहा है। इससे जलीय जीवों और महत्वपूर्ण वनस्पतियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। माफियों के सामने अफसर अवैध खनन को रोकने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
परिणामस्वरूप पर्यावरण तथा गंगा के किनारे की इकोलॉजी, जैव विविधता नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के तहत नदी के किनारे रेत का खनन प्रतिबंधित है।
खासतौर से मशीनरी के साथ खनिज का खनन पूरी तरह से गैर कानूनी है। सामान्य एवं आवश्यक खनन के लिए भी राज्य की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अथारिटी से स्वीकृति लेना आवश्यक है।
लेकिन यहां नियम, कानून को ठेंगे पर रख अवैध बालू खनन किया जा रहा है। इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रिंसिपल बैंच में मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई एक नवंबर को होगी।