जिले में शहर से लेकर देहात तक नियमों को ताक पर रखकर कुकुरमुत्तों की तरह स्वीमिंग पूल बन गए हैं। बिना एनओसी के चल रहे इन पूल के संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा इन पूलों में रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी बिना एनओसी चल रहे स्वीमिंग पूल को बंद कराने की बात कह रहे हैं।
क्षेत्र में कनिया कल्याणपुर, बछलौता रोड़, किठौर रोड, आवास विकास, मोड़ी, सुल्तानपुर, श्यामपुर रोड, उपैड़ा, सिंभावली आदि गांवों में अचानक दर्जनों स्वीमिंग पूल खुल गए हैं। अधिकतर स्वीमिंग पूल खाली पड़े प्लाट में बिना किसी मानक के बनाए गए हैं। जबकि कुछ किसानों ने सड़क किनारे खेतों में बना रखे हैं।
गर्मी बढ़ते ही इन पूलों पर ठंडक पाने वालों का तांता लगा रहता है। गर्मी में ये पूल ठंडक का अहसास भले ही कराते हों लेकिन इससे हो रहे पानी की बेहिसाब बर्बादी से भूगर्भीय जल को काफी नुकसान हो रहा है।
एक स्वीमिंग पूल में औसतन 40 से 50 हजार लीटर पानी जमा होता है। जिसे दिन में दो बार भरा जाता है। पूल को खाली करने के लिए इस पानी को नालियों में बहा दिया जाता है। कुल मिलाकर इन पूलों से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
अत्यधिक दोहन पर नहीं किसी की नजर-
भूगर्भीय जल दोहन के खिलाफ आए दिन प्रशासन की ओर से जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। लेकिन इन स्वीमिंग पूलों पर प्रशासन मौन हैं। नियमानुसार भूगर्भीय जल का दोहन करने वालों को वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाना जरूरी है। लेकिन किसी भी पूल संचालक ने ऐसा सिस्टम लगाने की जहमत नहीं उठाई है, जिससे पानी का रिसाइकिलिंग किया जा सके।
कोई मानक नहीं
स्वीमिंग पूल के संचालन के लिए कई मानक हैं। फैमिली पूल, क्लब पूल और दूसरे पूलों के लिए अलग अलग गहराई होती हैं। इसके लिए प्रदूषण, भूगर्भ जल विभाग के साथ नगर पालिका परिषद से एनओसी लेनी पड़ती है। एनओसी के अलावा पूल पर एक लाइफ सेवर व कोच की नियुक्ति अनिवार्य है। लेकिन जिले में अधिकतर पूलों पर यह सुविधा नदारद है।
मोटी कमाई का जरिया बने पूल
भीषण गर्मी में स्वीमिंग पूल युवाओं के लिए बेहतर विकल्प बन रहे है। ऐसे में पूल संचालक इस मौसम में अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। 40 से 60 रुपये प्रति घंटा की दर से पूल में प्रवेश दे रहे हैं। जबकि कुछ पूलों में दो हजार रुपये में मासिक सदस्यता भी दी जा रही है। इसके लिए अलग से कोई पार्टी का आयोजन करना हो तो उसके लिए भी पूल बुक किया जा रहा है।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
पूल में मस्ती के दौरान साफ सफाई का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. एसके गुप्ता का कहना है कि पूल के पानी को साफ रखने के लिए इसमें क्लोरीन आदि के अलावा बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए दवाईयों का छिड़काव जरूरी होता है।
इसके अलावा स्वीमिंग पूल में पहले बाहर नहाने के बाद पूल संचालक द्वारा दिये गए अंडरवीयर का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। लेकिन यहां ऐसा नहीं होता, जिससे लोगों में त्वचा रोग का खतरा बना रहता है।
इस मामले में एसडीएम अजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि बिना मानक और एनओसी के चल रहे पूल बंद कराए जाएंगे। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को इस संबंध निर्देशित किया जाएगा। ताकि नियम विरुद्ध पूलों का संचालन न हो सके।