पिछले 23 दिन से लेखपालों की हड़ताल जारी है। उनकी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार ने अब तक कोई सक्रियता नहीं दिखाई है। राज्यपाल ने भी इस हड़ताल को गैरवाजिब घोषित कर दिया है। ऐसे में लेखपाल संघ ने आंदोलन को और हवा देनी शुरू कर दी है। हड़ताल से स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
हड़ताल के बाद से तहसील में सभी प्रकार के प्रमाणपत्र, खसरा खतौनी व भूमि संबंधी अन्य कार्य ठप हैं। लोगों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल हापुड़ तहसील में ही आय, जाति, मूल निवास प्रमाणपत्र के 7600 आवेदन लंबित हैं।
इनमें 2877 आय, 2502 मूल निवास व 2221 जाति प्रमाणपत्र के आवेदन शामिल हैं। हड़ताल से अधिकतर युवा ही प्रभावित हैं। किसी की नौकरी अधर में है तो कई छात्र छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए परेशान हैं।
परेशान युवा प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील से लेकर धरनास्थल तक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन फायदा नहीं हो रहा है। पंचशील नगर कॉलोनी निवासी हेमंत कुमार का कहना है कि छात्रवृत्ति आवेदन के लिए 31 अगस्त अंतिम तिथि घोषित की थी,
लेकिन हड़ताल के कारण स्टूडेंट्स के आय, जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाए। ऐसे में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स आवेदन से वंचित रह गए। मोहल्ला गंज निवासी शाकिब हवारी भी प्रमाणपत्र न बनने के कारण छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं कर पाए।
गांव ट्याला निवासी जावेद खान ने बताया कि उसे दिल्ली में एक सरकारी विभाग में जॉब के लिए आवेदन करना है, लेकिन मूल निवास व जाति प्रमाणपत्र न होने के कारण वह आवेदन नहीं कर पा रहा है।
इस संबंध में तहसीलदार सुभाष सिंह ने कहा कि हड़ताल के कारण तहसील में बड़ी संख्या में लोग प्रमाणपत्रों व अन्य कार्य के लिए आ रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण कार्य बाधित हैं।