संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। मोनाड विश्वविद्यालय छापा प्रकरण में एसटीएफ ने रविवार को विश्वविद्यालय के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत 10 आरोपियों के खिलाफ पिलखुवा कोतवाली में केस दर्ज कराया। टीम ने शनिवार को विश्वविद्यालय में की गई जांच के बाद यहां से 1372 फर्जी मार्कशीट व डिग्रियों के अलावा 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन, 14 मोबाइल फोन, एक आईपैड, सात लैपटॉप, 26 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 6 लाख 54 हजार 800 रुपये नकद बरामद किए गए। दोपहर बाद एसटीएफ ने सभी आरोपियों को हापुड़ स्थित अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन द्वितीय की कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
दर्ज रिपोर्ट के अनुसार एसटीएफ ने उच्च अधिकारियों द्वारा प्राप्त शिकायती पत्र के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि मोनाड विश्वविद्यालय और हरियाणा के संदीप सेहरावत व उनके सहयोगी राजेश द्वारा फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाकर मोटी रकम में बेचा जा रहा है। एसटीएफ निरीक्षक ओमशंकर शुक्ला के नेतृत्व में एसटीएफ की दो टीमें गठित की गईं। शनिवार को टीम ने जाल बिछाया और मोनाड विश्विद्यालय के पास से संदीप सेहरावत को उसकी कार से गिरफ्तार कर लिया। संदीप के पास मोनाड विश्वविद्यालय की आठ फर्जी मार्कशीट मिलीं। पूछताछ में संदीप ने विश्वविद्यालय के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
- विश्वविद्यालय में मारा छापा
संदीप की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने विश्वविद्यालय के सी-ब्लॉक में छापा मारा, जहां विजेंद्र सिंह हुड्डा, मुकेश ठाकुर, अनिल बत्रा, नितिन कुमार सिंह, गौरव शर्मा, सनी कश्यप, इमरान, कुलदीप, विपुल ताल्यान को हिरासत में ले लिया गया। तलाशी में कई फर्जी दस्तावेज, नकदी, लैपटॉप, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए। जांच में पता चला कि बरामद दस्तावेजों को फर्जी हैं, क्योंकि इनमें प्रयुक्त एनरोलमेंट नंबर विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं। बरामद दस्तावेजों पर विश्वविद्यालय का नाम और डिजिटल हस्ताक्षर थे, जो फर्जी पाए गए।
एक मार्कशीट के लेते थे 50 हजार से चार लाख रुपये
पूछताछ में टीम को पता चला कि आरोपी लंबे समय से फर्जी मार्कशीट को बेचने का धंधा चला रहे थे। टीम के अनुसार अभियुक्तों ने कबूल किया कि वे संगठित गिरोह के रूप में काम करते थे और एक मार्कशीट या डिग्री के लिए 50 हजार से चार लाख रुपये लोगों से लेते थे। हरियाणा निवासी संदीप ने बताया कि वह फर्जी मार्कशीट व डिग्री विश्वविद्यालय के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा के कहने पर छापता था, उसका सहयोगी राजेश छपी हुई मार्कशीट व डिग्री को विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को पीले रंग के पैकेटों में अलग-अलग देकर जाता था। उसे प्रति मार्कशीट या डिग्री पांच हजार रुपये मिलते थे। एसटीएफ राजेश की तलाश कर रही है।
इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने संदीप सहरावत निवासी गांव चिरवाड़ी जिला पलवल हरियाणा, विजेंद्र सिंह हुड्डा निवासी कंकरखेड़ा मेरठ, मुकेश ठाकुर निवासी कटवारिया सराय नई दिल्ली, अनिल बत्रा सेक्टर 47 नोएडा, नितिन सिंह, आनंदलोक रुड़की रोड मेरठ, गौरव शर्मा निवासी रोशनपुर डाेर्ली रुड़की रोड हापुड़, सन्नी कश्यप निवासी अर्जुन नगर हापुड़, इमरान निवासी हापुड़, कुलदीप कुमार सिंह निवासी गांव बलवंतनगर जिला बुलंदशहर, विपुल ताल्या निवासी स्वर्ग आश्रम रोड हापुड़ शामिल हैं। इनके खिलाफ पुलिस ने जालसाजी कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने व संगठित अपराध करने की धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 340 (1), 340(2), 111 और 336(3)के तहत कार्रवाई की है।