नोटबंदी से प्रभावित गल्ला, फल और सब्जी मंडी उधार में डूबती जा रही है। गल्ला मंडी के साथ फल-सब्जी के थोक कारोबारियों की मानें तो इस समय मंडी करोड़ों केे उधार में डूब चुकी है। ग्राहकों से पुराना उधार मांगने पर वह पुरानी करेंसी दे रहे हैं।
ऐसे में न तो वह माल ले पा रहे हैं और न ही ऑर्डर दे पा रहे हैं। गढ़ रोड स्थित नवीन मंडी में थोक कारोबारी जगदीश प्रधान बताते हैं कि नोटबंदी ने व्यापार को खत्म कर दिया है। पुराना उधार फिलहाल डूबने की स्थिति में है।
गांव देहात के दुकानदार अभी भुगतान नहीं कर रहे हैं। साथ ही उधार मांगने पर पुरानी करेंसी दे रहे हैं। अब 500 के पुराने नोटों को लेकर क्या करें। किसान गुड़ लेकर आ रहे हैं, उन्हें भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
सब्जी कारोबारी खिलेंद्र सैनी ने बताया कि किसानों के भी कर्जदार होते जा रहे हैं। कैश नहीं होने के कारण पर्याप्त मात्रा में सब्जी भी नहीं मंगा पा रहे हैं। अभी तक 15 लाख रुपये उधारी में डूब चुके हैं।
फल विक्रेता दिलशाद का कहना है कि फल का कारोबार भी चौपट हो गया है। उधार में फंसी रकम आ नहीं पा रही। नोटबंदी के कारण गोदाम में फल सड़ रहे हैं। अब नया माल मंगवा नहीं पा रहे हें।
नोटबंदी के बाद से सब्जी और फल मंडी में सन्नाटे जैसी स्थिति है। कम ही संख्या में ग्राहक पहुंच रहे हैं। छोटे दुकानदार पुराना 500 का नोट या 2000 का नया नोट लेकर आता है। खुले पैसों को लेकर बेहद मुसीबत हो रही है।
ऐसे में जो सब्जी आती है उसे बेचना प्राथमिकता होती है। ग्राहकों की कम आवक और स्थानीय किसानों द्वारा अधिक सब्जी लाने के कारण सब्जी सस्ती ही बिक रही है।
फल और सब्जी के थोक व्यपारियों का कहना है कि उधार में फंसी रकम नहीं आने और बैंक से कैश नहीं मिलने के कारण वह बाहर के कारोबारियों का तकादा झेल रहे हैं। ऐसे में उनके रातों की नींद भी उड़ी हुई है।
सब्जी और फल मंडी की स्थित यह है कि यहां पर शहर और गांव से छोटा दुकानदार प्रतिदिन आता है और अपनी जरूरत के मुताबिक थोक में सब्जी फल आदि खरीद कर ले जाता है। उसे दिन में बेचकर अगले दिन सुबह फिर मंडी आते हैं।
इन छोटे दुकानदारों की स्थिति यह है कि वह न तो पेटीएम के जरिए भुगतान कर सकते हैं और न ही कार्ड स्वैप मशीन से।