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बुखार से सपा नेता सहित तीन की मौत

Thu, 29 Sep 2016 09:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
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बुखार से सपा नेता की मौत - फोटो : अमर उजाला
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बुखार ने बृहस्पतिवार को सपा नेता सहित तीन और लोगों की जान ले ली। अब तक क्षेत्र में बुखार से 62 लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके अफसर निष्क्रय बैठे हैं। सपा के पूर्व जिला सचिव,
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सिंभावली गन्ना समिति के पूर्व डायरेक्टर और गांव बदरखा की प्रधान फुलमिजरा के पति खलील चौधरी (56) को तीन दिन पहले बुखार हुुआ था। उन्हें पहले दिन ही परिजनों ने गढ़-चौपला के निजी चिकित्सक से दवा दिलाई थी।

आराम न होने पर परिजनों ने उन्हें मेरठ के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। वहां इलाज के दौरान बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई।

वहीं सिंभावली के गांव सैना में पांच दिन पहले मां राहिल और पिता कादिर के साथ नाना के घर आई 10 वर्षीय अफशा निवासी गांव जिसौरा थाना मुंडाली जनपद मेरठ, को अगले ही दिन बुखार हो गया।
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उसका पहले गांव और फिर सिंभावली के निजी चिकित्सक से इलाज कराया जा रहा था। बुधवार देर रात उसने दम तोड़ दिया। वहीं दौताई गांव में यासीन खां की 22 वर्षीय बेटी शगुफ्ता को बृहस्पतिवार दोपहर बुखार हुआ।

आनन-फानन में परिजन उसे तहसील रोड स्थित एक नर्सिंग होम में ले गए। इलाज शुरू होने के पहले ही युवती की मौत हो गई। मौत होने के बाद भी चिकित्सक युवती के जिंदा होने का झांसा देकर उसे किसी दूसरे नर्सिंग होम में भेजने की कोशिश में लगे रहे।

गढ़ सीएचसी अधीक्षक डॉ. रविंद्र कुमार और सिंभावली पीएचसी इंचार्ज डॉ. रोशन लाल ने कहा कि दोनों मृतकों के घर से मेडिकल जांच और दवाओं के पर्चे मंगाए जाएंगे। इसके बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।

गढ़ की आदर्श रामलीला कमेटी में 38 वर्षों से लगातार महामंत्री पद की जिम्मेदारी देखते आ रहे पंडित त्रिलोकी प्रसाद शर्मा को दो सप्ताह पहले बुखार हुआ था। कई दिनों तक निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद भी आराम न मिलने पर परिजन उन्हें मेरठ ले गए।

वहां भी हालत न सुधरने पर उन्हें गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इसके बाद परिवार के लोगों ने उन्हें गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया है। रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष विष्णु दत्त नागर ने बताया कि बुखार में मल्टी ऑर्गन फेल होने के कारण उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

गढ़ के सिविल कोर्ट और तहसील मुख्यालय में प्रैक्टिस करने वाले दर्जनों वकील भी बुखार की चपेट में हैं। इससे मुकदमों की कार्रवाई प्रभावित होने से वादकारियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।

बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बलराज त्यागी का आरोप है कि तहसील मुख्यालय और सिविल कोर्ट के पास से निकल रहे नालों में गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।

इससे दर्जनों वकील बुखार की गिरफ्त में हैं। पूर्व अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर पालिका प्रशासन ने अविलंब नालों की सफाई नहीं कराई तो पालिका दफ्तर का घेराव कर तहसील मुख्यालय पर धरना दिया जाएगा।

बुखार से शहर, देहात की गलियां ही नहीं जिलेभर के स्कूल कॉलेज भी सूने पड़ गए हैं। आलम यह है कि 30 फीसदी बच्चे और करीब 20 फीसदी स्टाफ बुखार की चपेट में होने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।

तीन अक्तूबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षा शुरू होने जा रही है, ऐसे में छात्रों की अनुपस्थिति चिंता का सबब बनी हुई है। एसएसवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजय कुमार ने बताया कि उनके विद्यालय में 2400 विद्यार्थी हैं,

लेकिन करीब 720 छात्र बुखार की चपेट में होने के चलते कॉलेज नहीं आ पा रहे हैं। करीब 20 फीसदी स्टॉफ भी बुखार से पीड़ित है। वहीं रामनिवास बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या पूनम त्यागी ने बताया कि उनके कालेज में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं।

बुखार के कारण 1064 में से 266 छात्राएं अनुपस्थित चल रही हैं। श्री शांति स्वरूप कृषि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सुबोध गुप्ता ने बताया कि उनके विद्यालय में 1300 में से 390 छात्र बुखार के कारण स्कूल नहीं आ पा रहे हैं।

20 फीसदी स्टॉफ भी बुखार की चपेट में है। चौधरी ताराचंद जनता इंटर कॉलेज में भी यही हाल है। प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके विद्यालय में 1590 छात्रों में से करीब 477 छात्र अनुपस्थित चल रहे हैं।

जिला विद्यालय निरीक्षक बीके शर्मा ने कहा कि बुखार के कारण स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी कम हो गई है। ऐसे में बहुत सारे बच्चे अर्द्धवार्षिक परीक्षा भी नहीं दे पा रहे हैं। इन छात्रों का भविष्य खराब न हो इसके बारे में विचार करेंगे।

बुखार के प्रकोप के कारण बिजली निगम के अधिकारी मुश्किल में फंस गए हैं। बीमारी के कारण करीब 57 फीसदी उपभोक्ता सितंबर माह में अब तक बिल जमा नहीं कर पाए हैं। इससे राजस्व वसूली का लक्ष्य काफी पिछड़ गया है। ऐसे में अब मजबूरी में अधिकारी सख्ती बरतने की तैयारी कर रहे हैं।

बुखार के कहर से सभी वर्ग परेशान हैं, लेकिन सर्वाधिक असर मजदूर तबके पर पड़ रहा है। एक तरफ बुखार से पीड़ित होने पर कामकाज छूट रहा है, तो दूसरी ओर आर्थिक तंगी के कारण लोगों को इलाज और अन्य जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है।

बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण बड़ी संख्या में लोग बिजली के बिल  नहीं जमा कर पाए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो गढ़-ब्रजघाट में करीब 6400 उपभोक्ता हैं। इनमें से 29 सितंबर तक महज 43 फीसदी उपभोक्ता ही बिल जमा कर पाए हैं।

देहात अंचल में तो बिलों की अदायगी की हालत इससे भी बदतर है। बुखार के प्रकोप से बिलों की अपेक्षित अदायगी न होने पर राजस्व वसूली का लक्ष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

जेई महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि बुखार का प्रकोप इस कदर फैला हुआ है कि पीड़ित उपभोक्ता इधर-उधर इलाज कराने में ही परेशान हैं। ऐसे में आधे से ज्यादा बिलों की अदायगी संभव नहीं हो पाई है।

सितंबर माह में अब महज एक दिन ही शेष बच पाया है। अगर अक्तूबर में बिलों की अदायगी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाई तो फिर राजस्व वसूली का लक्ष्य हासिल करने के लिए उपभोक्ताओं के साथ सख्ती बरतनी पड़ेगी।
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