कुचेसर चौपला स्थित जिला सहकारी बैंक के हजारों खाताधारक पाई-पाई को तरस रहे हैं। बीते एक सप्ताह से सात गांवों के हजारों ग्रामीणों को कैश नहीं मिल सका है। पुरानी करेंसी के नोटों को भी इस बैंक में जमा नहीं किया जा रहा है।
इससे परेशान ग्रामीण ना चाहते हुए भी औने-पौने दामों में धान आदि अनाज बेचकर अपनी जीविका चला रहे हैं। इन सात गांवों के किसानों को बेटियों की शादी करना भी चुनौती बन गया है।
नोटबंदी का सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव ऐसे ग्राहकों पर पड़ा है जिनका खाता जिला सहकारी बैंकों में है। आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार इन बैंकों में पुरानी करेंसी के नोट लिए जाने बंद कर दिए गए हैं।
वहीं, बीते एक सप्ताह से सहकारी बैंकों में कैश भी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को घर का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया है। कुचेसर चौपला स्थित जिला सहाकारी बैंक में गांव रसूलपुर, शाहपुर, फतेहपुर, शकरपुर, मारकपुर, कनिया, दयानगर के हजारों ग्रामीणों के खाते हैं।
गन्ना भुगतान का पैसा भी इन्हीं खातों में पहुंचता है। ग्रामीण सुबह आठ बजे से ही बैंक पर जुटना शुरू हो जाते हैं, लेकिन कैश खत्म का नोटिस देख मायूस लौट जाते हैं। कई बार ग्रामीण बैंक पर हंगामा कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।
मजबूरी में अब ग्रामीण घर खर्च चलाने के लिए धान आदि अनाज बेमन से बेच रहे हैं। वहीं, धान, आलू का जो पैसा किसानों को मिलता है वह पुरानी करेंसी का है। यह भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या है। इतना ही नहीं इन सातों गांवों के ग्रामीणों को अपने बच्चों की शादी करना भी काफी चुनौती भरा हो गया है।
एलडीएम एपी चतुर्वेदी का कहना है कि सहकारी बैंकों में पैसा भेजा जा रहा है। कुचेसर चौपला के बैंक में ग्राहकों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। जल्द ही कैश की व्यवस्था कराई जाएगी।