नियमितीकरण की मांग को लेकर शनिवार को गुस्साई आशा कार्यकत्रियों ने कलक्ट्रेट में हंगामा कर तहसील चौराहा पर जाम लगा दिया। इसके चलते पूरे शहर की रफ्तार थम गई। गुस्से का आलम यह था कि एक रिक्शा चालक ने चौराहे से गुजरने की कोशिश की तो आशाओं ने धुनाई कर दी।
सबसे बड़ी बात यह है कि रालोद के राष्ट्रीय महासचिव भी काफी देर तक इस जाम में फंसे रहे। करीब आधे घंटे बाद आशाओं का हुजूम सीएमओ कार्यालय की बढ़ा तो यातायात सुचारु हो पाया। उधर, धरना प्रदर्शन में आंगनबाड़ी की कार्यकर्ताओं ने भी साथ दिया।
नियमितीकरण की मांग को लेकर आशा कार्यकत्री कई दिन से आंदोलनरत हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। शनिवार सुबह 9 बजे ही आशाओं का जुलूस जिला मुख्यालय से शुरू होकर कोठीगेट होते हुए सीएमओ कार्यालय पर पहुंचा।
वहां अफसरों की मौजूदगी नहीं होने पर आशाओं ने खूब हंगामा किया। इसके बाद आशाएं बुलंदशहर रोड होते हुए तहसील चौराहे पर आकर जाम लगा दिया। कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर उन्होंने चौराहे को जाम कर दिया।
10 मिनट बाद कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे लेकिन आशाओं का आक्रोश देख मूकदर्शक बने रहे। जबकि आशाओं की नारेबाजी चलतीं रही। आशाओं का गुस्से का आलम यह था कि कोई वाहन चालक भीड़ से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। महिला पुलिस कर्मियों की कमी के चलते करीब आधा घंटे तक तहसील चौराहे पर आशाओं का कब्जा रहा।
जाम लगाने के दौरान एक रिक्शा चालक ने उधर से गुजरने की कोशिश की तो गुस्साई आशाओं ने रिक्शा चालक की जमकर धुनाई कर दी। इस दौरान वहां तैनात पुलिस कर्मी रिक्शा चालक को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
जिले के दो गांवों में आयोजित किसान चौपाल को संबोधित करने जा रहे रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी को भी आशाओं के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस दौरान जयंत चौधरी भी चुपचाप गाड़ी बैठकर आशाओं के जाम खोलने का इंतजार करते रहे। हालांकि, बाद में पुलिस ने उन्हें सड़क की दूसरी साइड से निकाला।
चौराहा पर जाम के दौरान मेरठ रोड से आ रही एंबुलेंस जाम में फंस गई। ऐसे में मरीज की हालत बिगड़ गई। पीड़ित परिजन आशाओं से सड़क से हटने की गुहार लगाते रहे लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनीं।
आशाओं के आंदोलन के चलते शहर, देहात में टीकाकरण भी प्रभावित हो रहा है। आशाओं ने जल्द राहत नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।
तहसील चौराहे पर जाम लगाने के दौरान एक कार्यकत्री को महिला पुलिस कर्मियों ने हिरासत में लेकर कोतवाली ले आयी। इससे कार्यकत्रियों में रोष फैल गया। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।