मंडी पाटिया बाजार में किराना की दुकान से सामान खरीदते ग्राहक। संवाद
हापु़ड़। तेल, चीनी, चावल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने में चीनी और खाद्य तेल समेत कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। बाजार में सबसे अधिक बढ़ोतरी सरसों तेल के दामों में दर्ज की गई है। व्यापारियों का कहना है कि सरसों की बाजार में सीमित आवक के कारण कीमतों में तेजी आई है।
खाने-पीने की रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आने से हर घर का मासिक खर्च बढ़ गया है। चीनी के दाम जहां पहले 45 रुपये प्रति किलो थे, अब दो रुपये बढ़ोतरी के साथ 47 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। सरसों के तेल के दाम में भी दस रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
काली सरसों का तेल 160 रुपये से बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो और पीली सरसों का तेल 200 रुपये से बढ़कर 210 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गए हैं। वहीं बासमती चावल की कीमतों में भी दस रुपये प्रतिकिलो की बढ़ोतरी हुई है। 100 रुपये प्रति किलो मिलने वाला बासमती चावल अब बाजार में 110 रुपये प्रति किलो के भाव से मिल रहा है।
गृहिणी आशा सोमानी, राधा शर्मा सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि चावल, तेल और सब्जी समेत रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ने से घर का बजट बिगड़ गया है। बच्चों की जरूरतें पूरी करना भी कठिन होता जा रहा है। पहले जितने सामान में महीने भर का काम चल जाता था, अब उतने में महीना निकालना भी मुश्किल हो रहा है। महंगाई बढ़ने से रसोई का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
किराना व्यापारी राजेंद्र पंसारी का कहना है कि बासमती चावल का निर्यात शुरू होने के बाद दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं सरसों की आवक बाजार में कम होने से तेल के दाम में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि रिफाइंड के दाम में में पांच से सात रुपये प्रति किलो की गिरावट हुई है।