मुकद्दस रमजान ने युवाओं समेत हर किसी की लाइफ स्टाइल बदल दी है। मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप में मशगूल रहने वाले युवा आजकल कुरान पाक की तिलावत और तस्बीहात पढ़ रहे हैं। वहीं अधिकांश घरों में टीवी बंद कर महिलाएं भी इबादत कर रही हैं।
मजहबे इस्लाम में एक माह के रोजे रखना अहम फरीजा है, जिसके चलते मुकद्दस रमजान का महीना शुरू होते ही हर किसी की लाइफ स्टाइल में बड़े स्तर पर बदलाव नजर आने लगा है।
मोबाइल, फेसबुक, टैबलेट और लैपटॉप पर मशगूल रहने वाला युवा वर्ग भी रोजे रखने के साथ ही घरों से लेकर मस्जिदों में नमाज अता करने, कुरान पाक की तिलावत और तस्बीहात में दिलचस्पी ले रहा है। जिससे क्रिकेट के मैदान में गेंद-बल्ले का खेल खेलने वालों की तादाद में काफी गिरावट आ गई है।
रमजान का महीना प्रारंभ होते ही अधिकांश घरों में टीवी भी बंद कर दी गई है, ताकि महिलाएं भी सास-बहुओं पर आधारित फैमिली ड्रामा देखने की बजाए अल्लाह की इबादत करने में विशेष दिलचस्पी ले रही हैं। बाजारों और गली-मोहल्लों के नुक्कड़ों पर घंटों मौज मस्ती करने वाले युवाओं की तादाद भी घट गई है।