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Hapur News: निजी स्कूलों ने बढ़ाई 10 से 25 फीसदी फीस,अभिभावकों को झटका

Thu, 10 Apr 2025 10:36 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। जिले के बहुत से प्राइवेट स्कूलों ने शैक्षिक सत्र (2024-25) की फीस में 10 से 25 फीसदी तक इजाफा कर दिया है। एडमिशन फीस भी काफी महंगी हो गई है। जिसके कारण अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। शुल्क निर्धारण समिति की बैठक अभी नहीं हो सकी है, जबकि सत्र शुरू हो गया है।
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कान्वेंट स्कूलों की महंगी फीस, कोर्स, यूनिफार्म खरीदना गरीब परिवारों के लिए चुनौती बन रहा है। करीब पांच साल पहले फीस बढ़ोतरी पर कई स्कूलों में हंगामा हुआ था। जिस पर फीस निर्धारण समिति का गठन हुआ था, हर साल फीस में पांच फीसदी बढ़ोतरी और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को जोड़कर फीस निर्धारण करने का आदेश दिया गया था। लेकिन अब समिति की शिथिलता के चलते स्कूल मनमर्जी कर रहे हैं। कई स्कूलों ने 25 फीसदी तक शुल्क बढ़ा दिया है। ऐसे में अभिभावकों को उच्च शिक्षा से ज्यादा महंगी प्राथमिकता शिक्षा लग रही है। महंगी फीस ही अभिभावकों के जी का जंजाल नहीं है, बल्कि निजी प्रकाशकों के कोर्स, एक ही चिन्हित दुकान से मिलने वाली ड्रेस, जूते भी जेब खाली कर रहे हैं।


कुछ निजी स्कूलों में फीस की स्थिति

कक्षा वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26

एक 1800 से 3000 2000 से 4000

तीन 2000 से 3500 2200 से 4200

पांच 2300 से 3800 2500 से 4600

आठवीं 3000 से 5400 3500 से 6400



एलकेजी और कक्षा दो के दो छात्रों की तीन महीने की फीस 45 हजार
शहर में चल रहे कुछ कान्वेंट स्कूल गरीब परिवारों की पहुंच से बेहद दूर हैं। एक अभिभावक की मानें तो उनका एक बच्चा एलकेजी और दूसरा कक्षा दो में है। उनकी तीन महीने की फीस ही 45 हजार रुपये है, जबकि ट्रांसपोर्ट अलग है।
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निरीक्षण में पकड़ा खेल, मनमानी कर रहे स्कूल

पिलखुवा के अर्वाचीन स्कूल में बीएसए ने निरीक्षण किया था, जिसमें बिना मान्यता के स्कूल संचालित होता मिला। साथ ही बेहद महंगे निजी प्रकाशकों के कोर्स स्कूल से ही बिक्री करने का भी पर्दाफाश किया। इस प्रकरण में नोटिस जरूरत जारी हुआ है, लेकिन सिफारिशों का दौर भी जारी है। ऐसे में गरीब अभिभावक ठोस कार्रवाई नहीं होने से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। दूसरे स्कूलों पर भी कोई खास असर नहीं दिख रहा।



इसी सप्ताह होगी बैठक

फीस निर्धारण को लेकर गठित समिति की बैठक इसी सप्ताह होगी। फाइल अंतिम चरण में है। हर साल फीस अधिकतम दस फीसदी तक ही बढ़ाई जा सकती है, वह भी नियम के अनुसार। पांच फीसदी फीस और कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स को जोड़कर फीस निर्धारण निकाला जाएगा। - डॉ.विनीता, डीआईओएस।
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