हापुड़। प्रदूषण का बिगड़ता स्तर लोगों को बीमार कर रहा है। पिछले एक सप्ताह से एक्यूआई 350 के पार बना हुआ है। चिकित्सकों की मानें तो ऐसी स्थिति में लोग न चाहते हुए भी करीब पांच से छह सिगरेट जितना धुआं शरीर के अंदर ले रहे हैं। यह स्थिति तब है जब हरे भरे इलाके आनंद विहार में ही एक्यूआई मापने का संयंत्र लगा है, जबकि शहर के हालात और गंभीर होंगे। ऐसे में चिकित्सक मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं।
दिवाली के बाद से जिले में वायु प्रदूषण ने लोगों को परेशान किया हुआ है। पिछले एक सप्ताह से हालात और गंभीर हैं। धुंध के कारण लोगों को फिर भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की मानें तो जहरीली हवा फेफड़ों पर असर डालती है। इससे टीबी जैसी बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है।
एक्यूआई का सूचकांक शनिवार को 346 दर्ज किया गया। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से जिला गैस चेंबर बन गया है। घर से बाहर निकलने पर सांस लेना भी दूभर हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से ग्रैप का तीसरा चरण भी लागू कर दिया है। लेकिन यह पूरी तरह से कागजी एहतियात है। शहर में कहीं भी इन पाबंदियों का असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिसके बाद परेशानी बढ़ रही है और लोगों में भी रोष बढ़ रहा है। जिसके बाद सांस के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
सांस के मरीजों की बढ़ रही संख्या
जिला अस्पताल में वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधित समस्या बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में बढ़ रही है। मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। कुछ बुजुर्ग गंभीर बीमार होते हैं तो उन्हें भर्ती किया जा रहा है। सीएचसी में फिजीशियन डॉ. अशरफ का कहना है कि प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों की संख्या ओपीडी में बढ़ रही है। मधुमेह व हाइपरटेंशन के मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। परेशानी होने पर चिकित्सक से तत्काल संपर्क करना चाहिए। घर से बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
नवजात शिशुओं को सबसे अधिक खतरा -
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग का कहना है कि प्रतिदिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें वायु प्रदूषण के कारण गले तथा सांस संबंधित परेशानी है। वायु प्रदूषण से सबसे अधिक परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। नवजात शिशुओं को दो पहिया वाहन पर लेकर जाए, तो कपड़े से ढक कर रखें।
एक्यूआई बढ़ने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव
एक्यूआई
स्वास्थ्य पर प्रभाव
- अच्छा (0-50)
कुछ नहीं।
- संतोषजनक (51-100)
संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- थोड़ा प्रदूषित(101-200) फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा, और हृदय रोग, बच्चों और बड़े व्यस्कों के साथ लोगों को असुविधा के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- खराब (201-300)
लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है।
- बहुत खराब (301-400)
लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस की बीमारी हो सकती है, फेफड़े और दिल की बीमारियां वाले लोगों पर प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है।
- गंभीर(401-500)
स्वस्थ लोगों का भी श्वसन खराब हो सकता है। फेफड़े, हृदय रोग वाले लोगों का प्रभाव गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
कोट -
प्रदूषण की निगरानी के लिए सभी विभागों को सचेत कर दिया गया है। इस संबंध में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जल्द ही राहत की उम्मीद है। - संदीप कुमार, एडीएम।