सरकारी अस्पतालों में बुधवार को फार्मेसिस्टों की हड़ताल चिकित्सकों के गायब रहने से असरदार रही। मरीजों को उनके पर्चियां बनाने के लिए भी भटकने पड़े। आलम यह रहा कि जिला अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सक अपने कार्यालय से नदारद रहे।
इसके चलते आपातकालीन कक्ष और जनरल वार्ड में भी मरीज तड़पते रहे। डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. बीएन सिंह ने बताया कि वह सरकार से वेतन विसंगति, प्रोन्नति, मानक निर्धारण, उच्च पदों का सृजन, पदों का पुनर्गठन, 10 वर्ष की सेवा पर राजपत्रित,
4600 वेतन बैंड को इग्नोर करने, ट्रामा सेंटर में पद सृजन की मांग उठा रहे हैं। लेकिन उनकी मांगे पूरी नहीं की जा रही है। इसके विरोध में मंगलवार को फार्मेसिस्ट अपने कार्य छोड़ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था बीमार हो गई।
बुखार से तप रहे सैकड़ों मरीज हड़ताल के कारण भटकते रहे। फार्मेसिस्टों की हड़ताल का लाभ जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने उठाया। अधिकांश चिकित्सक अपने कक्षों से नदारद रहे। ऐसे में मरीज उनके कार्यालय के बाहर तड़पते रहे।
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की लापरवाही का आलम यह रहा कि आपातकालीन कक्ष में मरीज घंटों तड़पते रहे। लेकिन अपराह्न दो बजे तक कोई चिकित्सक उनका हाल जानने नहीं पहुंच सका था। एक पुलिस कर्मी धौलाना क्षेत्र की महिला का मेडिकल कराने पहुंचा था।
लेकिन चिकित्सकों के न आने से वह भी घंटों इंतजार में बैठा रहा। अस्पताल के दवा काउंटर बंद रहने के कारण मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ी। ऐसे में उन्हें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि फार्मेसिस्टों की हड़ताल के चलते उन्होंने चिकित्सकों को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन कार्यालय से नदारद रहने वाले चिकित्सकों की लापरवाही वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस संबंध में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।