ग्रामीण अंचल के नाम पर जनसुविधा केंद्र का लाइसेंस लेकर संचालक शहरी क्षेत्रों में अपनी दुकान सजाकर ग्राहकों से वसूली कर रहे हैं। आलम यह है कि 16 रुपये में बनने वाले प्रमाणपत्र के लिए ऐसे जनसुविधा केंद्र संचालक 130 से 200 रुपये वसूली कर रहे हैं।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों की सहूलियत के लिए जनसुविधा केंद्र बनाए हैं। अब शहरी क्षेत्रों में भी ऐसे केंद्र खोले जा रहे हैं। लेकिन शहर क्षेत्र के जिस गली-मोहल्लों में जनसुविधा केंद्र नहीं खुले हैं, वहां ग्रामीण क्षेत्रों के जनसुविधा केंद्र संचालकों ने अपनी दुकानें खोल ली है।
इसकी एक बानगी स्वर्ग आश्रम रोड और अर्जुन नगर में देखने को मिली है, जहां ददायरा और सबली गांव के संचालकों ने अपनी लाइसेंस पर यहां जनसुविधा केंद्र चला रहे हैं। ये संचालक शहरी क्षेत्र के ग्राहकों से प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 16 रुपये की जगह 130 से 200 रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को इन केंद्रों की पड़ताल की तो पता चला कि यह केंद्र संचालक प्रशासन के अधिकारियों से सांठगांठ कर इस काम को अंजाम दे रहे हैं।
मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आए अभिषेक का कहना था कि उसे सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करना है, जिसके लिए मूल निवास प्रमाण पत्र की बहुत जरूरत है। लेकिन स्वर्ग आश्रम रोड पर जनसुविधा केंद्र चला रहे संचालक ने 150 रुपये लेकर कागजात बनवाए हैं।
10वीं की छात्रा प्रियांशी का कहना है कि उसे अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाना था। उसके पापा ने इस प्रमाण पत्र बनवाने में आने वाले खर्च के बारे में पता कि तो कीमत 16.50 रुपये बताई गई। लेकिन अर्जुन नगर के संचालक ने 130 रुपये वसूल किए।
जनसुविधा केंद्र के संचालक को अपनी दुकान के बाहर मालिक का नाम, लाइसेंस नंबर अंकित करना चाहिए। ग्राहक की सुविधा के लिए प्रमाण पत्र की रेट लिस्ट भी लगानी होती है। लेकिन ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में चल रहे दो दर्जन से अधिक जनसुविधा केंद्रों पर ऐसा कुछ नहीं है।
जनसुविधा केंद्र के संचालक ग्राहकों को का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वसूल किए गए रुपये की रसीद नहीं देते हैं।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रजनीश राय का कहना है कि इस मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। जन सुविधा केंद्र का लाइसेंस जिस स्थान के लिए वह वहीं चालू होना चाहिए।