परिवहन विभाग एक अक्टूबर से ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। अफसरों का दावा है कि इससे विभाग में दलालों पर शिकंजा कसेगा। लेकिन ऑनलाइन टेस्ट में सफल कराने के लिए अभी भी दलाल सक्रिय हैं। हालांकि, लाइसेंस प्रणाली के हाईटेक होने से दलालों की सक्रियता में कुछ कमी जरूर आएगी।
विभाग के एआरटीओ कार्यालय में फिलहाल आलम यह है कि लाइसेंस बनवाने पहुंच रहे युवाओं को देखते ही दलालों की भीड़ उन्हें अपने झांसे में लेने की कोशिश में लगी रहती है। एक अक्टूबर से ऑनलाइन लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस प्रक्रिया से दलालों की संलिप्तता खत्म हो जाएगी।
दरअसल, आवेदन के बाद टेस्ट में पास होने के लिए दलालों ने अभी से अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है। दलाल आवेदकों को इस बात का भरोसा दिला रहे हैं कि उनके बिना टेस्ट में पास होना संभव नही है।
यहां ऐसे बनता है डीएल -
एआरटीओ कार्यालय में दो पहिया लर्निंग डीएल के लिए टेस्ट की फीस मात्र 30 रुपये है। जबकि दलाल लर्निंग आवेदकों से सात से आठ सौ तक वसूल करते हैं। इसके अलावा परमानेंट डीएल की फीस 250 रुपये है। चार पहिया स्थाई डीएल की फीस 300 रुपये है। जबकि इसके लिए दलाल हजार से पंद्रह सौ रुपये तक वसूल करते हैं।
एआरटीओ प्रणव झा का कहना है कि ऑन लाइन प्रक्रिया लागू होने से काफी सहूलियत मिलेगी। दलालों की संलिप्तता अभी भी नहीं है। यह प्रक्रिया लागू होने से तो सारी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।