धनौरा से होकर गुजरने वाले एनएच-235 पर बृहस्पतिवार को जेसीबी लेकर कार्य करने पहुंचे एनएच कर्मियों को ग्रामीणों ने दौड़ा दिया। आरोप है कि हाईवे के लिए किसानों की जो भूमि अधिग्रहित की गई थी,
उसे ताक पर रख कर्मियों ने हाईवे को दक्षिण दिशा की ओर डेढ़ मीटर खिसका दिया। इसे देखकर मुआवजे को लेकर पहले से ही आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। भड़के ग्रामीणों ने गांव में पंचायत बुलाई।
इसमें असौड़ा गांव के बराबर 6600 रुपये/वर्ग मीटर की दर से मुआवजा, सही नपाई और विद्युत लाइन की शिफ्टिंग के बाद ही हाईवे निर्माण होने देने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि हापुड़-बुलंदशहर हाईवे (एनएच-235) को धनौरा गांव से होकर निकाला जा रहा है।
इसके लिए गांव के 60 किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई है। ग्रामीण शुरू से ही मुआवजा कम मिलने की बात कह कर अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इस गांव में हाईवे की चौड़ाई 60 मीटर रखी गई है। बृहस्पतिवार को एनएच कर्मचारी जेसीबी लेकर प्रस्तावित हाईवे पर कार्य करने पहुंचे। कर्मियों ने पहले से खेतों में लगे निशान की बजाय हाईवे को डेढ़ मीटर दक्षिण दिशा में खिसका दिया, इसके निशान भी खेत में लगा दिए गए।
कर्मियों की इस मनमानी को देख किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने एनएच कर्मियों को कार्य करने से रोक दिया। किसानों का कहना था कि अधिग्रहित भूमि पहले ही चिह्नित हो चुकी है। प्रभावित किसानों को 2420 रुपये/वर्गमीटर की दर से मुआवजा भी मिल चुका है।
कर्मियों ने प्रस्तावित हाईवे के लिए पहले से ही खेतों में लगे निशानों की बजाय अपनी मर्जी से नए निशान लगा दिए। इससे हाईवे करीब डेढ़ मीटर खिसक जाएगा। इसका किसानों को मुआवजा भी नहीं मिला है।
एनएच कर्मियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने कर्मियों की एक न सुनी और उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद गांव में पंचायत की गई। इसमें सर्वसम्मति से ग्रामीणों ने असौड़ा गांव के बराबर 6600 रुपये/वर्ग मीटर की दर से मुआवजा,
सही नपाई और विद्युत लाइन की शिफ्टिंग के बाद ही हाईवे निर्माण होने देने का निर्णय लिया।
विरोध प्रदर्शन करने वालों में जयभगवान त्यागी, बुद्धप्रकाश, ब्रजनाथ, विजय, गजेंद्र, चरण सिंह, काली चरण, सुखवीर, धर्मवीर, जयप्रकाश, जसवीर सिंह, अमर सिंह, सुभाष, ब्रह्म सिंह, अनिल आदि मौजूद रहे।