नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर हाईकोर्ट द्वारा सशर्त रोक है। पिछले ढाई साल से शस्त्र लाइसेंस केवल आपातकालीन मामलों में ही बनाए जा रहे हैं जबकि विरासत के शस्त्र लाइसेंस बनाने में कोई रोक नहीं हैं।
लेकिन जनपद की बात करें तो यहां विरासत के लाइसेंस की बात तो दूर शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं हो पा रहा है। इसके कारण 150 शस्त्र लाइसेंस निरस्त होने की कगार पर हैं। ऐसे शस्त्र लाइसेंस धारक प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाकर समस्या के समाधान की गुहार लगा रहे हैं।
बता दें कि प्रदेश में धड़ल्ले से बने शस्त्र लाइसेंस व जगह-जगह बिगड़ रहे माहौल को देखते हुए हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश में नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी।
हालांकि जरूरतमंदों को जांच के बाद लाइसेंस देने के अलावा वसीयत के लाइसेंस बनाने व नवीनीकरण आदि की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई। लेकिन जिले में न तो वसीयत के लाइसेंस ही बनाए जा रहे हैं और न ही लाइसेंस का नवीनीकरण ही हो रहा है।
दरअसल, हर तीन साल में शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाना जरूरी होता है। यह प्रक्रिया पूरी न होने पर लाइसेंस निरस्त भी हो सकता है। जिले में कुल 1166 शस्त्र लाइसेंस हैं, जिनमें 150 लाइसेंस ऐसे हैं जो नवीनीकरण न होने के कारण निरस्त होने की कगार पर हैं।
लाइसेंस धारकों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ऐसे लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कर रहे हैं जबकि लाइसेंस धारक वसीयत के लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कोई इस मामले में सुनवाई करने को तैयार नहीं है।
इस संबंध में एडीएम रजनीश राय का कहना है कि संबंधित अधिकारी से बात कर ऐसे मामलों का समाधान कराया जाएगा।