जिलेभर के परिषदीय स्कूलों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। कहीं बच्चे बिल्डिंग जर्जर होने के चलते खुले आसमान के नीचे तालीम पा रहे हैं तो कहीं फर्नीचर के अभाव में ठंडे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
कक्षाओं में रखे मिड डे मील का सिलेंडर भी बच्चों की जान पर खतरा बन रहे हैं। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट में एक शिक्षका भी बच्चों से रेत उठवाती मिली, कैमरा देख शिक्षिका ने अपने हाथों में रेत की बाल्टी ले ली।
रामलीला मैदान स्थित मालवीय प्राइमरी पाठशाला में 90 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षिका पर है। शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने की बजाए रेत उठवाती दिखी।
हालांकि, कैमरा देखते ही उसने बाल्टी अपने हाथों में ले ली। उसका कहना था कि रेत उड़कर बच्चों की आंखों में पड़ रहा था, इसलिए इसे उठवा रही थी।
बुलंदशहर रोड स्थित हमीद प्राइमरी कन्या पाठशाला की बिल्डिंग जर्जर हालत में है। छात्र खुले आसमान के नीचे बैठकर तालीम पा रहे थे। कक्षाओं में तीन गैस सिलेंडर रखे हुए थे। इससे बच्चे काफी भयभीत थे।
शिक्षक ने बताया कि मिड डे मील पकाने के लिए सिलेंडर रखे हुए हैं, हालांकि तीन सिलेंडर की बात पर वह चुप्पी साध गए।
रघुवीर गंज स्थित दयानंद पाठशाला में फर्नीचर नहीं था, चटाई भी फटी हुई थी। ऐसे में फर्श पर बैठे बच्चों ठंड से कुलबुला रहे थे।
छात्रा रेनू का कहना है कि सर्दी में चटाई आदि पर बैठते हैं तो उन्हें काफी ठंड लगती है। फर्नीचर आदि की व्यवस्था हो जाए तो आराम से वह पढ़ सकेंगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि बजट आने पर स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाती है। स्कूल बिल्डिंग की मरम्मत कराई जा रही है, वह स्कूलों का निरीक्षण भी कर रहे हैं। बच्चों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है।