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हौसला पोषण योजना पहले ही दिन धड़ाम

Wed, 03 Aug 2016 08:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
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दोपहर तक खाने को तरसीं गर्भवतियां, भूख से बिलबिलाए बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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अति कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई हौसला पोषण योजना पहले ही दिन फेल हो गई। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर दोपहर तक गर्भवती महिलाएं और कुपोषित बच्चे भूख से बेहाल रहे।
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दोपहर बाद खाना मिला भी तो रूखा-सूखा। डीएम के गोद लिए गांव में भी सुबह 11 बजे के बाद भोजन का वितरण किया जा सका। बुधवार को योजना के पहले दिन जिले के 818 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पौष्टिक भोजन सहित फलों का वितरण सुबह 10 बजे से किया जाना था

लेकिन असौड़ा में बने आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह 11 बजे तक भी भोजन का पता नहीं था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खुद भी भोजन आने या न आने को लेकर असमंजस में थी। लिहाजा उसने महिलाओं और बच्चों को 11 बजे तक केंद्र पर ही नहीं बुलाया था।
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मामला मीडिया तक पहुंचने पर हड़बड़ाए गांव के प्रधान ने आनन-फानन में खाना तैयार करवाया। असौड़ा के केंद्र पर गर्भवती महिलाओं को सिर्फ हलवा और तहरी वितरित कर दी गई, जबकि मेन्यू के अनुसार महिलाओं को दही और फल भी दिए जाने थे।

इसी गांव के पंचायत भवन में बने आंगनबाड़ी केंद्र पर दोपहर तक कार्यकर्ता खाना आने के इंतजार में बैठी थी। यहां भी कार्यकर्ता ने दुविधा के कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को केंद्र पर नहीं बुलाया था।

इतना ही नहीं डीएम के गोद लिए गांव ट्याला में भी दोपहर 11 बजे के बाद गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन का वितरण किया जा सका। इस गांव के केंद्रों पर गर्भवती महिलाएं घंटों इंतजार के बाद भी खाना नहीं मिलने से परेशान थीं।

महिलाओं ने बताया कि सुबह नौ बजे से केंद्र पर बैठे हैं लेकिन 11 बजे तक भी खाना नहीं मिला है। महिला जमीला ने बताया कि वह अपने अतिकुपोषित बच्चे को लेकर आई हैं। दोपहर हो गई है, बच्चा भूख से बेहाल है लेकिन अब तक खाने का कहीं पता नहीं है।

हौसला पोषण योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह 10 बजे से ही पौष्टिक भोजन बंटना था। जिन केंद्रों पर समय से भोजन का वितरण नहीं हुआ है, वहां जांच करवाकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सावित्री देवी, जिला कार्यक्रम अधिकारी 

जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बुधवार को ग्राम इम्टौरी, अनवरपुर, तिसौली खेड़ा और दौलतपुर ढीकरी के प्राथमिक विद्यालयों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा संचालित हौसला पोषण योजना का शुभारंभ किया।

जिलाधिकारी ने केंद्रों पर मौजूद गर्भवती महिलाओं व अति कुपोषित बच्चों को भोजन में हलवा, खिचड़ी, दही व बच्चों को फल, घी और आयरन की गोलियां आदि अपने हाथों से दीं। डीएम ने अतिकुपोषित बच्चों का वजन भी चेक करवाया।

जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि भोजन वितरण में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा न किया जाए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय से भोजन व आयरन की गोलियां उपलब्ध कराई जाएं। गर्भवती महिलाओं व अतिकुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए।

प्रदेश सरकार की हौसला पोषण योजना का मंगलवार को शुभारंभ तो हो गया लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते अफसरों के हाथ पांव फूल गए। एक सुपरवाइजर ने तो एक प्रधान से विनती करते हुए कहा कि प्लीज आप ही अपने पास से खाना बनवाकर बंटवा दें, अन्यथा उस पर अफसरों की गाज गिर जाएगी।

मामला नली हुसैनपुर गांव का है। वहां के प्रधान मनोज चौधरी मंगलवार को काफी गुस्से में नजर आए। वजह, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने हौसला पोषण योजना को लागू करने के संबंध में निर्देश तो काफी कड़े दिए लेकिन जेब ढीली नहीं की।

उनका कहना था कि जब पैसा ही नहीं आया तो योजना को लागू कैसे किया जाए। सुपरवाइजर अनीता यादव के अनुरोध पर उन्होंने स्कूल की रसोई में 64 बच्चों और महिलाओं का भोजन बनवाकर वितरित करवाया।

इसी तरह गढ़ी की प्रधान मंजू बामल ने बताया कि वहां भी प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। बीडीओ के अनुरोध पर उन्होंने 33 बच्चों और 26 गर्भवती महिलाओं को तहरी, हलवा और केला वितरित करवाए।
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कुल मिलाकर ग्राम प्रधानों का कहना है कि सरकार को इस योजना को प्रारंभ कराने से पहले पैसा भेजना चाहिए था। बिना संसाधन योजना कैसे लागू की जाएगी।
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