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अब गंगा में नहीं गिरेगी गांवों की गंदगी

Mon, 23 Jan 2017 10:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
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गंगा - फोटो : अमर उजाला
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नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा को निर्मल व अविरल बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस लिया है। प्रोजेक्ट के तहत गंगा के किनारे बसे गांवों का कचरा एकत्र कर सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (एसएलडब्लूएम) के तहत कंपोस्ट बनाकर निस्तारित किया जाएगा।  सोमवार को डीएम ने संबंधित विभागों की बैठक कर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
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एनजीटी गंगा को साफ और शुद्ध करने के लिए तत्पर है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत इस पर भारी भरकम बजट भी खर्च किया जा रहा है। इस दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। गंगा के किनारों बसे गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के प्रयास के बाद इन गांवों के कचरे को निस्तारित करने के लिए कार्यवाही जारी है।

सोमवार को डीएम अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पार्श्वनाथ ने बताया कि गांवों से निकलने वाले कूड़े को एकत्र करने के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। शाहपुर गांव में करीब 2.65 हेक्टेयर भूमि में डंपिंग ग्राउंड बनाया जाएगा।
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भूमि का मुआवजा वितरित कर सेंटर बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। कूड़े से प्लाटिक व अन्य घातक पदार्थों को अलग कर बाकी से खाद बनाया जाएगा। कचरे का आधुनिक मशीनों से निस्तारण किया जाएगा।

इन सेंटरों पर काम करने के लिए आसपास के ग्रामीणों को रोजगार व कचरे की कीमत ग्रामीणों को दिए जाने की भी योजना है। उन्होंने बताया कि गढ़ और ब्रजघाट में करीब आठ करोड़ की कीमत से दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का कार्य शुरू हो गया है। इसके बाद गांवों और शहर के घरों से निकलने वाला दूषित पानी शुद्ध होने के बाद ही गंगा में जाएगा।

ओडीएफ के लिए प्रयासरत है नगर पालिका  
नगर पालिका परिषद गढ़मुक्तेश्वर के जेई पंकज गुप्ता ने बताया कि गांवों के घरों का गंदा पानी किसी भी रूप में गंगा में न जाए इसकी व्यवस्था की जा रही है। गढ़ के 15 वार्ड ओडीएफ हो चुके हैं। जल्द ही पूरे नगर को भी शौच मुक्त कर लिया जाएगा।

वहीं, डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि एनजीटी के आदेशों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में कार्य में तेजी लाते हुए शत प्रतिशत कूड़े का निस्तारण सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि गंगा को निर्मल बनाया जा सके।
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यह होगा लाभ
-तरल व ठोस कचरे का एक जगह निस्तारण होगा
-किसानों को मिलेगी कचरे की कीमत
-गोबर से बना कंपोस्ट खाद किसानों को वापस मिलेगा
-प्लांट की गाड़ियां ले जाएंगी गांवों से कचरा
-वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सेंटरों पर ग्रामीणों को दिया जाएगा रोजगार
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