मृदा और मनुष्य के स्वास्थ के सुधार के लिए दलहन की फसलें वरदान हैं, लेकिन इन फसलों को नीलगाय चट कर जाती हैं। इसके चलते जिले में दलहन का रकबा भी लगातार घटता जा रहा है। छह वर्ष पूर्व तक चली तारबंदी की योजना से हालात में कुछ सुधार आया था, लेकिन इस योजना के दम तोड़ने से जिले के किसान परेशान हैं।
जिले में करीब 48059 हेक्टेयर कृषि भूमि का क्षेत्रफल है। इसमें से लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में मटर, चना, मसूर और अरहर की खेती होती है। जबकि, दलहन फसलों की बुआई के लिए यहां की मृदा और मौसम अनुकूल है।
नीलगाय (वनरोज) की समस्या दलहन की फसलों के आड़े आ रही है। दलहन की फसल नीलगाय का प्रिय भोजन है, जिसे वह चट कर जाती हैं। इसके चलते किसान दलहन की फसलों से अपना मुंह फेर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि शासन द्वारा नीलगाय के नियंत्रण के लिए तारबंदी (घेरवाड़) योजना करीब छह वर्ष पूर्व बंद हो चुकी है। ऐसे में किसानों को तारबंदी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वन विभाग को इस ओर कारगर कदम उठाने चाहिए, अन्यथा किसानों की सभी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।