सुविधाजनक एवं तेज रफ्तार यातायात के लिए बनाये गये हाईवे पर अनियंत्रित गति लोगों की मौत का सबब बन रही है। अकेले पिलखुवा क्षेत्र में वर्ष 2016 के जनवरी माह से अब तक 75 जिंदगी दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ चुकी हैं।
साथ ही सौ से अधिक लोग अपंग भी हो चुके हैं, फिर भी पुलिस के अधिकारियों द्वारा अनियंत्रित गति से वाहनों को चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र की सीमा के नजदीक हापुड़ कोतवाली क्षेत्र में
नेशनल हाईवे पर कार में सवार चार लोगों की मौत लेने वाला ट्रक पहला नहीं है। इससे पहले हाईवे पर बेकाबू वाहन कितने ही लोगों को मौत का शिकार बना चुके हैं। लोगों के खून से हाईवे आये दिन लाल होता रहता है।
जिसमें अधिकांश का कारण तेजगति ही होती है, क्योंकि तेजगति के चलते वाहन नियंत्रित नहीं हो पाता है और हादसा हो जाता है। गति नियंत्रित हो तो अनेक घटनाओं को चालक रोक सकते हैं।
अकेले पिलखुवा क्षेत्र में हाईवे पर दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर समेत अनेक स्थानों के 75 लोगों की वर्ष 2016 के जनवरी माह से अब तक यानि 11 माह 9 दिन में मौत हो चुकी है।
जबकि सौ से अधिक लोग अपंग हो चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस के आला अधिकारी अनियंत्रित गति से दौडने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं।
आये दिन हाईवे पर वाहनों के मौत होने से नागरिक भी परेशान हैं। नागरिकों का आरोप है कि तेज गति से गुजरने वाले वाहन यातायात पुलिसकर्मियों के सामने से गुजर जाते हैं, फिर भी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी जाती।
कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत एनएच-24 पर अनवरपुर के पास, डूहरी भट्टे के पास, लाखन कट, जिंदल कट के पास सबसे ज्यादा हादसें होते हैं। अगर इन स्थानों पर ही चेकिंग अभियान चल जाये तो हादसों पर अंकुश लग सकता है।
समय-समय पर शिविर लगाकर चालकों को तेज गति से वाहन चलाने के नुकसान बताकर जागरूक किया जाता है,लेकिन फिर भी लोग नहीं मानतें। जल्द अ िनयंत्रित गति से हाईवे पर वाहन दौड़ाने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी ताकि वाहनों के अनियंत्रित होने से हादसे नहीं हो सकें। अतुल यादव-सीओ पिलखुवा