हापुड़। स्वास्थ्य विभाग की लचर सेवाओं के कारण एक दिन के नवजात की मौत हो गई। सांस लेने में दिक्कत होने पर अमरोहा से इस बच्चे को साधारण एंबुलेंस से मेरठ रेफर किया गया था। रास्ते में हालत बिगड़ने पर बच्चे को अभिभावक हापुड़ सीएचसी ले आए। लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। समय रहते यदि नर्सरी और वेंटिलेटर की सुविधा मिलती तो उसकी जान बच सकती थी।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए 102 और 108 नंबर एंबुलेंस संचालित करता है। इसके साथ ही गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की भी व्यवस्था हर जिले में है। अमरोहा के गांव रसूलपुर गांवड़ी निवासी कासिम की पत्नी का अमरोहा के ही सरकारी अस्पताल में प्रसव हुआ। लेकिन नवजात शिशु को सांस लेने में समस्या बन रही थी।
जिसे मेरठ रेफर कर दिया गया, लेकिन बच्चे की हालत गंभीर होते हुए भी उसे साधारण 108 नंबर एंबुलेंस से भेज दिया गया। जिसमें सिर्फ ऑक्सीजन की ही व्यवस्था थी। हापुड़ के नजदीक ही बच्चे की हालत और अधिक बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने एंबुलेंस चालक से हापुड़ सीएचसी ले चलने के लिए कहा।
चालक ने सरकारी एंबुलेंस को हापुड़ सीएचसी पहुंचा दिया। परिजनों का दावा है कि बच्चे में कुछ सांसें चल रहीं थी। लेकिन सही समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण वह ठंडा पड़ गया। चिकित्सकों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया। बता दें कि लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर व अन्य जीवनरक्षक संसाधन होते हैं, जिसमें बच्चे की जान आसानी से बचाई जा सकती थी।
परिजनों का कहना था कि जब चिकित्सकों को बच्चे की हालत के बारे में पता था, तो उन्होंने क्यों साधारण एंबुलेंस से रेफर किया। कुल मिलाकर हर कोई यही कह रहा था कि सिस्टम की नाकामी से एक नवजात की मौत हो गई। रोते बिलखते परिजन नवजात शिशु का शव लेकर वापस लौट गए।
अमरोहा से मेरठ रेफर किया गया था शिशु-
अमरोहा से नवजात शिशु को स्थानीय चिकित्सकों ने मेरठ रेफर किया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे हापुड़ सीएचसी लाया गया, चिकित्सकों ने तत्काल बच्चे को देखा लेकिन वह मृत अवस्था में था। - डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ।