शहर में करीब दस लाख रुपये पालिका फागिंग पर खर्च करती है। लेकिन मच्छरों पर दवा का असर नहीं हो रहा है। आलम यह है कि फाइलों में फागिंग हो रही है और शहर में मच्छरों की भरमार हो रही है।
ऐसे में मच्छरों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। मच्छरों के काटने से बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मच्छरों से बचाव के लिए फागिंग अवश्य करवाई जाए, ताकि मच्छरों को खत्म किया जा सके।
नगर पालिका परिषद करीब दस लाख रुपये सालाना फागिंग की दवा पर खर्च करती है। शहर में इस बार फागिंग फाइलों में ही चल रहा है। इससे लाखों रुपये बर्बाद हो रहे हैं। पालिका और प्रशासन के अधिकारी इस ओर गंभीर नहीं हैं।
रोस्टर बनाकर शहर के सभी 36 वार्डों में फागिंग कराई जा रही है। मानक के अनुसार दवाईयां प्रयोग की जा रही हैं। पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। अगर किसी स्थान पर दिक्कत है तो उसे बताया जाए। - मुख्य सफाई निरीक्षक दिलशाद हसन
मच्छरों के कारण बुरा हाल है। फागिंग कभी कभार ही होती है, लेकिन उससेे मच्छर ही नहीं मरते हैं। - आमिर सैफी
बिजली की आंख मिचौली के कारण रात में काफी दिक्कत होती है। ऊपर से मच्छरों का कहर सोने नहीं देता है। फागिंग कराते समय दवा का सही प्रकार से प्रयोग हो ताकि मच्छर मर सकें। - अमर शर्मा
पालिका को चाहिए कि मच्छरों का प्रकोप खत्म कराने के लिए समय से फोगिंग कराई जाए ताकि मच्छरों से होने वाली बीमारियों को रोका जा सके। आकाश गोयल