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Hapur News: मोनाड यूनिवर्सिटी में 53 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला उजागर

Thu, 05 Feb 2026 10:13 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। मोनाड विश्वविद्यालय ने 14 सालों में 16, 300 छात्रों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर, करीब 53 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला किया है। सामान्य जाति के छात्रों को एससी दर्शाकर यह घोटाला हुआ है। हापुड़ में सात सदस्य टीम की सात महीने की जांच में यह खुलासा हुआ है। इस प्रकरण में, डीएम ने यूनिवर्सिटी को ब्लैक लिस्ट में डालने की संस्तुति कर, रिपोर्ट शासन में भेज दी है। शासकीय समिति इस पर निर्णय करेगी, अब इस मामले में विश्वविद्यालय पर एफआईआर कराने की तैयारी है।
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दरअसल, मोनाड विश्वविद्यालय में फर्जी अंकतालिका का मामला सामने आने पर बड़ी संख्या में छात्रों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने के आरोप लगाए थे। अमर उजाला ने छह जून 2025 को इस समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। शासन ने संज्ञान लेकर, डीएम को खबर संलग्न कर, आख्या मांगी थी।

यहीं से छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश शुरू हुआ। 9 जून को संयुक्त निदेशक मेरठ व जिला समाज कल्याण अधिकारी हापुड़ को जांच सौंपी गई। इसमें टीम ने 9 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। सात महीने तक चली इस जांच में स्पष्ट पाया गया कि मोनाड विश्वविद्यालय द्वारा अपने यहां पढऩे वाले एससी/एसटी/सामान्य वर्ग के छात्रों के डाटा में से कूटरचित उपस्थिति पंजिका निर्मित की गई है।
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जांच में यह भी पाया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा 2012-13 से 2024-25 तक सामान्य वर्ग के कतिपय छात्रों का आवेदन एससी/एसटी वर्ग अंकित करते हुए छात्रवृत्ति एवं शुल्क आवेदन कराया गया। इसमें कूटरचित एवं शासकीय धनराशि का गबन सिद्ध हुआ है।

बहरहाल, इस पूरे प्रकरण में डीएम ने जनपदीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति के अनुमोदन के बाद यूनिवर्सिटी को ब्लैक लिस्ट/मान्यता निरस्त करने की संस्तुति कर, शासन में समाज कल्याण विभाग के निदेशक को पत्र लिख दिया है। कूटरचित दस्तावेज बनाने पर यूनिवर्सिटी पर एफआईआर शासन और जिला स्तर से की जा सकती है।

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मास्टर डाटा से हटेगा विश्वविद्यालय का नाम-

छात्रवृत्ति घोटाला पकड़ा जाने के बाद विश्वविद्यालय को डिबार किया जाएगा। साथ ही छात्रवृत्ति के मास्टर डाटा से विश्वविद्यालय का नाम भी हट जाएगा। ऐसे में यहां छात्रवृत्ति के आधार पर छात्रों का प्रवेश भी नहीं हो सकेगा।

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-36 जनपदों के छात्रों की उपस्थिति में खेल

छात्रवृत्ति योजना में छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी तक होने का प्रावधान है। लेकिन मोनाड विश्वविद्यालय ने इसमें खूब खेल किया। समाज कल्याण अधिकारी द्वारा भेजे प्रपत्र पर कोई जवाब नहीं दिया। विश्वविद्यालय ने सिर्फ हापुड़ के छात्रों का ही ब्योरा उपलब्ध कराया। जबकि यहां 36 जिलों के छात्रों के एडमिशन थे। लेकिन ये छात्र कहां रहते हैं इसका विश्वविद्यालय ने कोई ब्योरा नहीं दिया है।



इस तरह हड़पते थे छात्रवृत्ति-

विश्वविद्यालय ने पढने आने वाले बहुत से छात्रों के एडमिशन छात्रवृत्ति आधार पर ही करा लिए जाते थे। यहां छात्रों का बैंक में खाता खुलवाकर, उनसे एटीएम कार्ड ले लिया जाता था। जैसे ही छात्रवृत्ति आती थी एटीएम से पैसा निकाल लिया जाता था। जिनके पास एटीएम कार्ड नहीं होता था उनसे पासबुक के जरिए पैसा निकलवाया जाता था। यदि कोई छात्र पैसे देने से मना करता था तो उनकी मार्कशीट रोक दी जाती थी।



-छात्रवृत्ति घोटाले में आख्या शासन को भेजी

छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में पूरी आख्या शासन में भेज दी गई है। मास्टर डाटा से मोनाड विश्वविद्यालय का नाम हटेगा। इसे काली सूची में शामिल करने की संस्तुति डीएम द्वारा कर दी गई है।शिवकुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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