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Hapur News: छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर मोनाड ने छात्रों के दाखिले किए निरस्त

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हापुड़। मोनाड विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट बेचने के अलावा छात्रवृत्ति को लेकर भी बड़ा खेल चल रहा था। फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति हासिल करने के लिए छात्रों को दाखिले दिए गए। समाज कल्याण विभाग ने आवेदन निरस्त किए तो विश्वविद्यालय ने दाखिले भी निरस्त कर दिए। फर्जी मार्कशीट का मामला सामने आने के बाद एसटीएफ के अधिकारियों ने जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है। कुछ छात्रों ने भी जिलाधिकारी से मिलकर इस संबंध में शिकायत की थी।
समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के छात्रों को पात्र मिलने पर छात्रवृत्ति देता है। अल्पसंख्यक विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग अलग से छात्रवृत्ति देता है। समाज कल्याण विभाग में मोनाड विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति के लिए जो आवेदन आए, उसमें से 80 प्रतिशत आवेदन व डाटा को संदिग्ध मानते हुए निरस्त कर दिया गया।
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आवेदन मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग ने करीब पांच बिंदुओं पर आख्या मांगी थी। इसमें छात्र का उपस्थिति प्रतिशत, उपस्थिति रजिस्टर की कॉपी और छात्र दूसरे जिले से आकर हापुड़ में कहां व किस पते पर रह रहा है आदि। इसकी जानकारी मोनाड विवि के प्रबंधन ने उपलब्ध नहीं कराई। आवेदन करने वालों में अधिकतर छात्र मऊ, गोरखपुर, झांसी, कुशीनगर, बांदा, चित्रकूट, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा और जालौन सहित प्रदेश के 30 जिलों के निवासी थे। 60 छात्र मथुरा जिले के थे। इन छात्रों को मोनाड विवि के 59 कोर्सों में दाखिला मिला था।
कुछ छात्रों ने जिलाधिकारी से भी मिलकर शिकायत की थी। छात्रों ने बताया था कि दूर के जिलों और अन्य प्रदेश के छात्रों के दाखिले लेकर उन्हें छात्रवृत्ति दिलाने का प्रयास किया गया। शिकायत के बाद भी बिना जांच किए कई छात्रों को छात्रवृत्ति दे दी गई। छात्रों का यह भी आरोप था कि मोनाड विवि में छात्रवृत्ति के लिए उन्होंने आवेदन किया था, जिसके बाद उनसे बैंक की चेकबुक और एटीएम ले लिया गया। छात्रवृत्ति खाते में आने के बाद भी उन्हें नहीं मिली थी। जिन छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली, उनके दाखिले भी विश्वविद्यालय ने निरस्त कर दिए थे।

समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015-16 से लेकर 2022-23 तक समाज कल्याण विभाग से मोनाड विवि के छात्रों को 93 करोड़ की छात्रवृत्ति बांटी गई, इसमें से अधिकतर धनराशि वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक दी गई है। अल्पसंख्यक विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने अलग से छात्रवृत्ति दी है। जिसका डाटा दोनों विभाग अभी दबाए बैठे हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि एसटीएफ की टीम ने फोन कर कुछ जानकारी ली थी, लेकिन अभी लिखित में डाटा नहीं मांगा है। लिखित में पत्र मिलने के बाद डाटा उपलब्ध कराया जाएगा। इस बार मार्च में छात्रवृत्ति के लिए मोनाड विवि के 80 प्रतिशत डाटा को गलत मानते हुए आवेदन निरस्त किए गए हैं। कई बार छात्रों से संबंधित जानकारी के लिए विवि प्रबंधन को पत्र लिखे गए, लेकिन जवाब तक नहीं दिया।
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मोनाड विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद शासन से भी प्रक्रिया तेज हो गई है। पूरे फर्जीवाड़े की जांच के लिए अगले सप्ताह शासन से उच्च शिक्षा विभाग की टीम यहां पहुंचेगी। प्रमुख सचिव के नेतृत्व में जांच की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक जिलाधिकारी की ओर से यूनिवर्सिटी की मान्यता निरस्त करने के संस्तुति के बाद शासन ने टीम भेजकर जांच कराने का निर्णय लिया है। टीम फर्जी डिग्री व मार्कशीट की बिक्री करने के मामले के साथ ही यूनिवर्सिटी में मानकों के पालन की भी जांच करेगी। यूजीसी की मान्यता की भी जांच की जाएगी।
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