संचार क्रांति के साथ ही हर मोबाइल हर घर में मोबाइल फोन पहुंच गया है। इसके साथ ही बेहतर नेटवर्क मुहैया कराने के लिए शहरी और ग्रामीण अंचलों में मानकों को ताक पर रखकर मनमानी ढंग से मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं।
नागरिकों के विरोध के बाद भी इस ओर अफसर गंभीर नहीं हैं। इनसे नागरिकों के स्वास्थ्य पर भयंकर प्रभाव पड़ रहा है।
मोबाइल सेवा के लिए बीएसएनएल के शहर में 7 मोबाइल टावर लगे हैं।
इनके अतिरिक्त निजी नेटवर्क कंपनियों के भी दर्जनों टावर नगर में लगे हुए हैं। आबादी के बीच मोबाइल टावर होने के कारण इनसे निकलने वाली विकरणों से मानव स्वस्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
आलम यह है कि नगर में आये दिन मोबाइल टावरों के विरोध में नागरिक विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं। लेकिन इन टावरों को आबादी के बीच से हटाने के संबंध में कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।
इतना ही नहीं मोबाइल कंपनियों से किराए व नौकरी के लालच में रिहायशी क्षेत्रों के निजी भवनों व भूमि पर मोबाइल टावर खड़े किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं निजी भवनों की छतों पर भी टावर खड़े किए जा रहे हैं जो कभी भी हादसों का सबब बन सकते हैं।
मोबाइल टावरों से इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगे निकलती हैं, जिनके संपर्क से सिर दर्द के अलावा थकान, याद्दाशत में कमी, दिल व फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं। इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगे कौशिकाओं को नष्ट कर कैंसर पैदा करने में सक्षम हैं, इससे दिल की बीमारियां भी हो सकती हैं।