हापुड़। गांवों में बिजली उपभोक्ताओं को गलत बिल मिल रहे हैं। मीटर रीडर दो महीने में एक बार बिल निकालने पहुंचते हैं, जबकि एक महीने कार्यालय में बैठक ही मनमर्जी यूनिट डालकर बिल बना देते हैं। उपभोक्ता कार्यालय के चक्कर लगाकर थक गए हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा।
जिले के तीनों डिवीजन में 3.10 लाख उपभोक्ता हैं, जिन्हें मीटर से सप्लाई मिलती है। बिल निर्गत कंपनी का टेंडर प्राइवेट कंपनी के पास है, लेकिन कर्मचारी पर्याप्त नहीं होने के कारण देहात अंचल में हर महीने रीडर नहीं पहुंच पा रहे। जो उपभोक्ता हर महीने बिल जमा करना चाहते हैं, उन्हें भी परेशान होना पड़ रहा है।
आश्चर्य की बात यह है कि जब उपभोक्ता अपना बिल लेकर कार्यालयों में जाते हैं, तो उन्हें सॉफ्टवेयर की कमी बताकर टरका दिया जाता है। ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिससे परेशान होकर अब आईजीआरएस व अन्य माध्यमों से उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं।
केस नंबर-एक
ददायरा निवासी धर्मपाल शर्मा ने बताया कि वह घर का बिल ऑनलाइन जमा करता है। लेकिन मीटर रीडर रीडिंग के अनुसार बिल नहीं बना रहे। इस समस्या को लेकर अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन राहत नहीं मिल सकी है। बिलों में गड़बड़ी कर उससे हजारों रुपये जमा करा लिए हैं।
केस नंबर दो
पीरबाउद्दीन निवासी समीर का कहना है कि उसके घरेलू कनेक्शन का बिल करीब 800 रुपये आता था, जबकि नवंबर में 3750 रुपये का बिल आया है। उसके घर पर ऐसा कोई विद्युत उपकरण नहीं है, जिससे लोड के कारण ज्यादा बिल आ सके। हर महीने बिल बढ़ रहा है, इस समस्या को लेकर बिजलीघर पहुंचा, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
कोट -
कार्यालय में आने वाले उपभोक्ताओं की हर समस्या का निस्तारण कराया जा रहा है। संबंधित पटल के कर्मचारियों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस तरह के मामलों में और अधिक सख्ती की जाएगी। - आरपी वर्मा, अधिशासी अभियंता।