हापुड़। नकली मार्कशीट बनाकर युवाओं को ऑनलाइन बेचने वाले मास्टरमाइंड ने निजी विश्वविद्यालयों की फ्रेंचाईजी लेकर काम शुरू किया था। इसके बाद उसने इतनी जानकारी जुटाई कि वह नकली मार्कशीट बनाने का मास्टर माइंड बन गया। मार्कशीट बनाने की कला उसने गूगल और यू ट्यूब से सीखकर खुद को परिपक्व कर लिया।
शुक्रवार को नगर कोतवाली और स्वाट टीम ने फर्जी मार्कशीट बनाने के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड गिरीश शर्मा निवासी मोहल्ला राजेंद्रनगर सेक्टर-तीन साहिबाबाद, अमित व मनोज निवासी गांव बछलौता जिला हापुड़ को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न विश्वविद्यालय की करीब 140 फर्जी मार्कशीट, डिग्री व अन्य शैक्षिक दस्तावेज बरामद किए थे।
स्वाट टीम प्रभारी पटनीश कुमार ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में मास्टरमाइंड गिरीश शर्मा ने बताया कि उसने सबसे पहले विश्वविद्यालयों की फ्रेंजाइजी लेकर छात्रों को प्रवेश दिलाने का कार्य शुरू किया था। इसके बाद उसने मार्कशीट और अन्य शैक्षिक दस्तावेज छापने की प्रक्रियाओं की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। अपनी मंशा के अनुसार उसने अपने काम के लोगों को शामिल किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि मात्र एक कंप्यूटर और प्रिंटर से उसने आसानी से विभिन्न विश्वविद्यालयों की मार्कशीट छाप डाली। गूगल और यू-ट्यूब पर सभी विश्वविद्यालयों के लोगो से लेकर उनके बार कोड आदि सभी मौजूद हैं। ऐसे में उसने आसानी से मार्कशीट बनाना सीख लिया।
शादी के लिए मांगते थे ऑन डिमांड डिग्री
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके पास ऐसे युवक और परिजन भी आते थे जो केवल दिखाने के लिए डिग्री चाहते थे। युवती के परिजनों को दिखाने के लिए एमबीए, एलएलएम, एमसीए जैसी डिग्री के लिए 10 से 20 हजार रुपये तक देते थे। ऐसे में आरोपियों का धंधा खूब चल रहा था।