मकर संक्रांति पर शनिवार को सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने, खाने और खिलाने का विशेष महत्व है।
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी और गढ़ में भद्रकाली मंदिर के पुजारी पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि शनिवार सुबह 7:35 बजे सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसका पुण्यकाल दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा।
इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होने लगता है। इससे शुभ कार्य का आरंभ हो जाता है। सौरमास की दृष्टि से माघ मास का आरंभ भी इसी दिन से होता है। मकर संक्रांति को सनातन धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन मोक्ष दायिनी गंगा में स्नान और दान का विशेष महत्व है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने, खाने और खिलाने का विशेष महत्व है। माघ मास में तिल दान का सबसे ज्यादा महत्व है। इस दिन तिल का दान, तिल स्नान और तिल खाना चाहिए। तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि माघ में प्रयागराज गंगा स्नान का विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्र भी इसी महीने आती है। इसमें नारायण भगवान की पूजा व गंगा स्नान, तिल दान, विद्या दान, पुस्तक, ग्रंथ दान का भी विशेष महत्व है।
महाभारत के युद्ध के दौरान घायल हुए भीष्म पितामह ने लंबी प्रतीक्षा के बाद मकर संक्रांति के दिन ही अपने शरीर का परित्याग किया था।
गढ़ के मुख्य बाजार स्थित प्राचीन पंचायती मंदिर के पुजारी पंडित सुरेंद्र प्रसाद शास्त्री ने बताया कि शनिवार सुबह भगवान सूर्य धनु राशि से चलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवधि से लेकर देर रात तक गंगा मैया में डुबकी लगाने का शुभ मुहूर्त बना रहेगा।
पालिका ईओ पूर्णिमा सिंह ने बताया कि मकर संक्रांति पर ब्रजघाट गंगा में डुबकी लगाने आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद रहेंगी। भक्तों को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग कराई गई है।
सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पेयजल सप्लाई सुचारु रखने के लिए जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है। प्रशिक्षित गोताखोर और नाव भी मौके पर मौजूद होंगे।