उप संभागीय कार्यालय अपनी करतूतों से आए दिन सुर्खियां बटोर रहा है। अब विभाग ने मात्र दो दिन की अवधि का लाइसेंस जारी कर अपनी लापरवाही का एक और सबूत पेश किया है।
सबसे मजे की बात यह है कि जब तक धारक को डाक के जरिए लाइसेंस मिला। उसकी वैधता भी छह दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। अब विभागीय अधिकारी पूरे मामले से अंजान बने हुए हैं।
मेरठ रोड स्थित आवास विकास कालोनी निवासी आलोक भटनागर ने उप संभागीय कार्यालय में लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन किया था। विभाग ने 20 सितंबर को लाइसेंस जारी कर डाक से निर्धारित पते पर भेज दिया।
विभाग के लापरवाह कर्मियों ने लाइसेंस की वैधता महज दो दिन दर्ज की। 28 सितंबर की शाम पोस्टमेन लाइसेंस लेकर आलोक भटनागर के यहां पहुंचा। जिस पर लाइसेंस का लिफाफा खोलकर देखने पर आलोक सन्न रह गए।
उन्होंने ने बताया कि पहली बार लाइसेंस बनवाया लेकिन विभाग की लापरवाही से महज दो दिन में लाइसेंस की वैधता भी खत्म हो गई। उप संभागीय परिवहन अधिकारी एसएस सिंह का कहना है कि लाइसेंस नियम अनुसार जारी किया गया है।
50 वर्ष की उम्र पूरी होने के चलते दो दिन का लाइसेंस जारी कर दिया गया था। दोबारा आवेदन मिलने पर लाइसेंस की अवधि पांच वर्ष के लिए बढ़ा दी जाएगी।