नगर पालिका परिषद हापुड़ के परिसर में स्थित महावीर पाठशाला के बच्चे 15 दिन से मिड डे मील (एमडीएम) को तरस रहे हैं। पाठशाला में तैनात अध्यापिका के चार्ज न लेने व अवकाश पर चले जाने के कारण यह समस्या है।
खाना न मिलने से अधिकांश बच्चों ने स्कूल आना छोड़ दिया है। अब एक शिक्षामित्र के भरोसे यह स्कूल चल रहा है। सरकार परिषदीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए मिड डे मील पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
नगर की महावीर पाठशाला में 15 दिन से बच्चों को मिड डे मील ही नहीं मिल रहा है। जबकि इसी बिल्डिंग में चल रहे तीन अन्य स्कूलों के बच्चों को समय पर मिड डे मील दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पाठशाला में तैनात अध्यापिका ने मेडिकल लीव ले लिया। स्थिति यह है कि 15 दिन से पाठशाला में पढ़ रहे बच्चों को मिड डे मील नहीं मिल रहा है। यहां तैनात एक शिक्षामित्र पर ही बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा है।
आलम यह है कि भोजन नहीं मिलने के कारण 55 में से 15-20 बच्चे ही स्कूल पहुंच रहे हैं। इस पाठशाला के लिए एक रसोई भी स्वीकृत हुई थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानाध्यापक ने उसका पैसा बंटर-बांट कर दिया।
छात्रा सायना का कहना है कि उनके स्कूल के बराबर में चल रहे अन्य स्कूलों के बच्चों को रोजाना एमडीएम मिलता है। लेकिन उन्हें 15 दिन से भूखा रहना पड़ रहा है।
छात्र रिहान का कहना है कि काफी दिनों से मिड डे मिल नहीं मिल रहा है। मजबूरी में वह अपने घर से खाना लेकर आ रहे हैं।
छात्र अजनान का कहना है कि काफी दिनों से मिड डे मिल नहीं आ रहा है। बराबर के स्कूल के बच्चों को रोजाना भोजन मिलता है। मजबूरी में वह अपने घर से खाना लेकर आ रहे हैं।
छात्रा सुम्मिया का कहना है कि दोपहर के समय बहुत तेज भूख लगती है, लेकिन उनके स्कूल में एमडीएम नहीं बांटा जाता है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि स्कूल में मड डे मील न बंटना गंभीर मामला है। इस संबंध में जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।