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Hapur News: संपत्ति के विवाद में हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा

Mon, 10 Mar 2025 09:02 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने संपत्ति के विवाद में हुई हत्या के मामले में करीब साढ़े पांच वर्ष बाद सोमवार को फैसला सुनाया। जिसमें जिसमें न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, अन्य दो आरोपी नाबालिग होने के कारण उनके मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है।
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गांव ऊंचा अमीपुर थाना जारचा जिला गौतमबुद्धनगर निवासी मुन्नी देवी ने थाना धौलाना में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि 17 सिंतबर 2019 को उसका पुत्र संजय अपनी सुसराल जाने के लिए घर से करीब सुबह सात बजे निकला। वह उसकी बहन के पुत्र को भी अपने साथ लेकर गया। जिसके बाद सूचना मिली की उसके पुत्र संजय का शव धौलाना थाना क्षेत्र में मिला है।

पुलिस ने सूरज निवासी गांव ऊंचा अमीपुर थाना जारचा जिला गौतमबुद्धनगर सहित तीन के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से न्यायालय में मजबूत पैरवी की गई है। जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा कई गवाह भी न्यायालय में पेश किए गए।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को फैसला सुनाया। जिसमें उन्होंने आरोपी सूरज को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की धनराशि में से दस हजार रुपये मृतक की माता को देने के आदेश भी किए। वहीं, अन्य दो आरोपियों के नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई चल रही है।



विवेचकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश-

जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि निरीक्षक विशाल श्रीवास्तव हाल तैनाती विशेष जांच प्रकोष्ठ मुज्जफरनगर व निरीक्षक रविरतन सिंह हाल तैनाती थाना सिकंद्राबाद जनपद बुलंदशहर के द्वारा मामले की विवेचना में घोर लापरवाही बरती गई है। अभियुक्तों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सीसीटीवी के संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 65 बी के अन्तर्गत अनिवार्य प्रमाणपत्र के साक्ष्य का संकलन नहीं किया गया है। विवेचकों द्वारा अभियुक्तों को नाजायज लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर त्रुटिपूर्ण विवेचना करके घोर लापरवाही और पदीय कर्तव्य की उपेक्षा की गई है। इसलिए उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाती है।
साथ ही आदेश में कहा है कि हापुड़, मुज्जफरनगर व बुलंदशहर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि विवेचकों के खिलाफ की गई कार्रवाई से न्यायालय को 60 दिन के अंदर अवगत किराए। साथ ही आदेश की एक-एक प्रति पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश व गृह सचिव उत्तर प्रदेश को अवलोकनार्थ प्रेषित की जाए।
संपत्ति विवाद में हुई थी हत्या

मृतक के माता मुन्नी देवी तीन बहनें हैं। उनके कोई भाई नहीं था। मृतक की मां को अपने पिता का हिस्सा मिला था। आरोपी की निगाह उसकी संपत्ति पर थी जिसको लेकर संजय की हत्या की गई थी।

नमकीन के पैकेट ने खोला राज-

शव मिलने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को जांच के दौरान मौके से सोड़े की बोतल व मूंगफली की नमकीन के पैकेट मिले। जिनको फॉर्रेसिंक टीम ने जांच के लिए कब्जे में लिया। जांच में अभिुयक्त सूरज के अंगूठे के निशान नमकीन के पैकेट पर मिले थे, जिससे जांच में पुलिस को काफी मदद मिली थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि उन्होंने धौलाना की एक गिफ्ट गैलरी से चाकू खरीदा था। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से दो आरोपियों की पहचान हुई थी। इसी फुटेज का विवेचकों ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 65बी. के अंतर्गत अनिवार्य प्रमाणपत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया।
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