हापुड़। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिले में चलने वाले अनेकों कार्यक्रमों की गति बजट की कमी से धीमी पड़ गई है। बीमार बच्चों के सर्वे के लिए टीम क्षेत्र में भी नहीं जा पा रही हैं, क्योंकि चारों ब्लॉकों में लगी गाड़ियों का भुगतान ही नहीं हुआ है। पिछले साल का भी पोलिया, जननी सुरक्षा योजना समेत कई कार्यक्रमों से जुड़े भुगतान अटके पड़े हैं।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग में अब सबसे अधिक योजनाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ही चलाई जाती हैं। इसी मिशन में सबसे अधिक पैसा भी आता है। लेकिन जिम्मेदारों की हीलाहवाली के चलते महत्वपूर्ण कार्यों के भुगतान अटक रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन, जननी सुरक्षा योजना, फील्ड विजिट जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
दिसंबर 2024 में पोलियो अभियान चलाया गया था, इसमें कार्य करने वाली कर्मचारियों का भुगतान अभी भी अटका हुआ है। पिछले साल के भी कई महत्वपूर्ण कार्यों का पैसा अभी तक रिलीज नहीं किया जा सका है। एनएचएम के माध्यम से ही सबसे अधिक कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। इनका काम फील्ड में घूमकर बीमार बच्चों को चिह्नित करना, आयरन की गोली खिलाना समेत कई ऐसे कार्य शामिल हैं जो गाड़ियों के अभाव में नहीं जा पा रहे। जबकि बहुत से कार्यालयों में महत्वपूर्ण पटलों पर वर्षों से जमे हैं। कई का रसूख तो विभाग के सरकारी अधिकारियों से भी अधिक है, जो चर्चा का विषय बना है।
जिला एकाउंट मैनेजर स्थानांतरित, बढ़ेगी समस्या
हापुड़ में स्थायी तौर पर जिला एकाउंट मैनेजर के रूप में शिव महेंद्र नियुक्त थे। उन पर मेरठ का अस्थायी चार्ज था, लेकिन पिछले दिनों उन्हें मेरठ की ही जिम्मेदारी दे दी गई। ऐसे में अब हापुड़ में यह पद खाली हो गया है। जिला डाटा मैनेजर को यह कार्य दिया गया है। इस महत्वपूर्ण पटल के लिए बेहद अनुभवी अधिकारी की जरूरत होती है।
जल्द किया जाएगा भुगतान
डीपीएम सतीश कुमार का कहना है कि एनएचएम के अंतर्गत चल रहे कार्यों का भुगतान जल्द कराया जाएगा। बजट अब मिलने लगा है। भुगतान संबंधी समस्या अब नहीं रहेगी। सर्वे और क्षेत्र भ्रमण में लापरवाही नहीं बरतने दी जाएगी।