हापुड़। जिले में 15 साल बाद जनगणना होने जा रही है। इसके लिए पहले स्लम क्षेत्रों का चिंन्हाकंन होगा। एडीएम संदीप कुमार को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं, मलिन बस्तियों की एक सूची भी तैयार हो रही है।
जनगणना के दौरान ग्राम, नगर रजिस्टर एवं मानचित्रों का पुनरीक्षण व सत्यापन भी होगा। शासन की ओर से निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दो चरणों में पूरी होने वाली इस प्रक्रिया के पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (मई-जून 2026) और दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना (फरवरी 2027) की जाएगी। एडीएम संदीप कुमार का कहना है कि जिले में जनगणना का कार्य जल्द शुरू होगा। इसे लेकर जल्द ही वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी। इसके बाद जिला स्तर पर रुपरेखा तैयार की जाएगी।
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डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना को पूरी तरह से डिजिटल रखा जाएगा, इसमें स्व-गणना का प्रावधान भी किया गया है। बता दें कि एक जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक इन सीमाओं में कोई भी परिवर्तन नहीं किए जाने हैं। जनगणना 2011 के बाद जिला अंतर्गत तहसील, ब्लॉक, ग्राम नगर एवं वार्ड स्तर पर होगी, इसमें समस्त क्षेत्राधिकार परिवर्तन को अंतिम रूप देते हुए जानकारी संकलित एवं सत्यापित कर निर्धारित प्रपत्रों में प्रस्तुत किया जाना है।
31 दिसंबर 2025 की स्थिति में दिया जाएगा अंतिम रूप
समस्त प्रशासनिक इकाइयों और जनपद, तहसील, राजस्व ग्राम, नगर पालिकाओं आदि की सीमाओं को 31 दिसंबर 2025 की स्थिति में अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके अलावा ग्राम अथवा नगर रजिस्टर एवं मानचित्रों का पुनरीक्षण एवं सत्यापन, नगर के बाह्य विकास क्षेत्र की पहचान के तहत नगर निकाय की सीमा से सटे हुए ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं, जो नगर की सीमा से जुड़े हैं।