अशोक कालोनी निवासी कक्षा 12 के छात्र ने सात देशों की दुर्लभ मुद्रा, 25 देशों के डाक टिकट का संकलन कर सभी को हैरान कर दिया है। भारत में वर्ष 1835 में संचलित (आना) मुद्रा को भी उसने संजोकर रखा है।
बीते दस साल में वह करीब 200 मुद्राओं का संकलन कर चुका है। संजीव कुमार जैन का पुत्र शोभित जैन स्वर्ग आश्रम रोड स्थित टीएसएस इंटर कालेज में कक्षा 12 का छात्र है। बचपन से ही उसे दुर्लभ वस्तुओं को संजोकर रखने का सोक है।
10 साल में उसने 7 देशों की मुद्रा और 25 देशों के डाक टिकटों का भी संकलन किया है। शोभित जैन ने बताया कि इन मुद्रा और डाक टिकट को जुटाने के लिए उसे कठिन परिश्रम करना पड़ा है। वह ऐसे लोगों को अक्सर तलाशता था, जो विदेश जाते हैं।
सड़क पर इधर उधर पड़े सदियों पुराने पैसों का भी उसने संकलन किया है। उसके पास भारत में 1835 से संचलित तमाम मुद्राएं उपलब्ध हैं। इसमें पाई, आना, पैसा, रुपया मुद्राएं हैं। उसने बताया कि भविष्य में उसका लक्ष्य विश्व भर के देशों की दुर्लभ मुद्राओं को जुटाना है,
वह इस प्रयास में लगा हुआ है। शोभित जैन ने यूएसए, अरब, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, यूरोप, सिंगापुर, नादरलैंड, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया, माल्टा, चाईना, मंगोलिया,
रोमन, जापान, रुमानिया, स्पैन, क्यूबा, फ्लकलैंड, कनाडा समेत 25 देशों के डाक टिकट मौजूद हैं। उसने नेपाल, भूटान, यूएसए, इंडिया, यूके, श्रीलंका की दुर्लभ मुद्रा का भी संकलन किया है।