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Hapur News: दो साल में दो गुना हुए दाम, उद्योगों के लिए नहीं मिल रही जमीन

Sun, 19 Jan 2025 10:40 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। यूपी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान नए उद्योगों को लगाने के लिए आए अधिकतर प्रस्ताव ठंडे बस्ते में हैं। उद्यमियों को सस्ती जमीन न मिलने के कारण उद्योग लगाने में परेशानी आ रही है। जिले में जमीन के दाम पिछले दो साल में दो गुना बढ़ गए हैं। सस्ती जमीन न मिलने के कारण यहां उद्योग लगाना काफी महंगा हो गया है। ऐसे में समिट में आए 564 प्रस्तावों में से मात्र 63 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतरे हैं।
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पिछले साल हुए इनवेस्टर्स समिट में जिले में 36 हजार करोड़ के एएमयू पर हस्ताक्षर हुए थे। यहां उद्योग लगाने के लिए उद्यमी काफी उत्साहित भी दिखाई दिए थे। लेकिन अधिकतर योजनाएं किसी न किसी कारण से ध्वस्त हो गईं। जबकि इन योजनाओं से जिले के करीब दो लाख 28 हजार लोगों को रोजगार भी मिलना था।

विभागीय अधिकारियों की मानें तो उद्यमियों की समस्याओं का निस्तारण कर 148 नए उद्योगों के लिए रास्ता साफ किया गया है। इन उद्योगों का धरातल पर उतारा जाना तय माना जा रहा है। लेकिन फिलहाल इसमें देरी हो रही है। हालांकि विभाग का दावा है कि इन उद्योगों से करीब 44000 लोगों को रोजगार भी मिलेगा। लेकिन अब तक की वास्तविक स्थिति के अनुसार कुल आए एएमयू में से मात्र 63 प्रोजेक्ट यानि योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सका है। अभी भी जमीन न मिलने या भूमि का उपयोग में बदलाव न होने या फिर उद्यमियों की रुचि बदलने के कारण अधिकतर बड़े प्रोजेक्ट लटक गए हैं।
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50 से अधिक उद्यमियों को सस्ती भूमि की तलाश

उद्यमियों की मानें तो जिले में पिछले दो तीन वर्षों में भूमि के दामों में तेजी से उछाल आया है। यहां हापुड़, गढ़ और पिलखुवा में हाईवे के आसपास की जमीनों के दाम दो गुना बढ़ गए हैं। ऐसे में यहां उद्योग लगाने की सोच रहे उद्यमियों के बजट बिगड़ गए हैं। सस्ती जमीन की तलाश में 50 से अधिक आवेदन विभाग के पास मौजूद हैं लेकिन सस्ते दाम पर जमीन की तलाश पिछले एक साल में भी नहीं हो पाई है। जिले में सबसे अधिक उद्यमी धौलाना क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहते हैं। यह क्षेत्र दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा से लगा हुआ है। इस कारण कच्चा माल कम किराए पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है। उद्यमियों के पास जिस स्थान पर भूमि है, वह वर्तमान में दस्तावज में कृषि में दर्ज है। ऐसे में उद्यमियों को लंबे समय से भूमि का परिवर्तन कराने में समय लगा है। जबकि, नए औद्योगिक क्षेत्र जिले में विकसित नहीं हुए हैं।

भू-उपयोग बदलवाने के लिए दिए प्रस्ताव

प्राधिकरण और राजस्व विभाग से जमीन का भू-उपयोग बदलवाने के लिए भी 10 से अधिक उद्यमियों ने प्रस्ताव दिए हुए हैं, लेकिन लंबे समय से यह प्रस्ताव पास नहीं हुए हैं। ऐसे में उद्यमी सिर्फ आस लगाए हुए हैं। यही कारण है कि फैक्टरी लगाने में देरी हो रही है।

जिले में इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्तावों की स्थिति

समिट में आए कुल प्रस्ताव - 564

कुल प्रस्तावों की धनराशि - 36 हजार करोड़
अब तक लग चुके प्रोजेक्ट - 63



धनराशि से लग चुके प्रोजेक्ट - 4000 करोड़


कुल लोगों को अब तक मिला रोजगार - 12000

कोट -

समिट में आए प्रस्तावों में आ रही अड़चनों को दूर किए जाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां कम दाम में जमीन मिल रही है, उन्हें चिन्हित कर उन्हें उद्यमियों को मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।- पंकज निर्वाण, उपायुक्त उद्योग।
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