गढ़ और सिंभावली क्षेत्र डार्क जोन में होने से फ्री बोरिंग योजना समेत नलकूपों के नए कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। इससे अपेक्षित सिंचाई के अभाव में किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। भूजल स्तर बढ़ जाने के बाद भी क्षेत्र को डार्कजोन के ठीकरे से निजात नहीं मिल रही है।
सर्वे में गढ़, सिंभावली और हापुड़ ब्लॉकों के भू-जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई थी। इसके आधार पर सिंचाई विभाग की सिफारिश पर शासन ने तीनों ब्लॉकों को डार्क जोन घोषित कर दिया था। इन क्षेत्रों में नलकूप कनेक्शन पर रोक लगाने के साथ ही फ्री बोरिंग स्कीम को रोक दिया गया था। इससे किसानों के सिंचाई संसाधनों की बढ़ोतरी रुक गई। हापुड़, गढ़ और सिंभावली ब्लॉक क्षेत्र में किसानों के सामने सिंचाई संसाधनों की कमी होती जा रही है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गढ़ और सिंभावली ब्लॉक के अधिकांश गांव गंगा किनारे हैं। इस
से पहाड़ों पर बारिश से गंगा में उफान आने पर जंगल का जलस्तर महज 20 से 25 फुट की गहराई पर आ गया है। इसके बाद भी संबंधित विभाग के स्तर से किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। भाकियू जिला प्रभारी दिनेश खेड़ा और वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष रामपाल चौहान ने सीएम को ज्ञापन भेजकर तीनों ब्लॉकों को डार्क जोन से बाहर करने का आग्रह किया है। अफसरों के अनुसार किसानों को सिंचाई के पर्याप्त साधन न मिलने से पैदावार प्रभावित होती है। इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
जा चुकी है रिपोर्ट -
क्षेत्रीय भू-जल संसाधन अधिकारी उमेश श्रीवास्तव के अनुसार विभाग प्रत्येक दो साल पर ग्राउंड वाटर का सर्वे कर केंद्र को भेजता है। इसमें ग्राउंड वाटर लेबल से ज्यादा ध्यान उसके गिरने की तीव्रता पर दिया जाता है। सर्वे किसी एक सीजन या बरसात के मौसम पर आधारित नहीं होता है। अभी तक 2011 के सर्वे के आधार पर क्रिटीकल और सेमीक्रिटीकल एरिया का निर्धारण किया गया था। हमने 2013 की रिपोर्ट भेज दी है। जल्द ही उसके आधार पर क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा। यह निर्धारण आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के चलते किए जाते हैं।
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