यदि आपको बुखार आया है और जिला अस्पताल में दो बजे के बाद इलाज कराने की सोच रहे हैं तो बीमारी के साथ परेशानी भी बढ़ सकती है। इसका कारण यह है कि दोपहर दो बजे के बाद अस्पताल के स्टाफ नदारद रहते हैं।
चिकित्सकों की लापरवाही का आलम यह है कि जच्चा-बच्चा वार्ड में ही वायरल, डायरिया के मरीज को भर्ती कर दिया गया है, इससे नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।
दरअसल, यह अस्पताल इलाज में लापरवाही को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहा है। इलाके के हर घर में इन दिनों बुखार के मरीज पड़े हैं। बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस बार चिकित्सकों ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दी हैं।
दोपहर दो बजते ही वार्ड में मरीजों को रामभरोसे छोड़ दिया जाता है। इन दिनों बुखार के मरीजों को ग्लूकोज की बोतल के सहारे दवाएं चढ़ाई जा रही हैं। यदि बोतल दो बजे से पहले खत्म हो जाती है तो नली को हाथ से निकाल लिया जाता है।
यदि दो बजे के बाद बोतल खत्म होती है तो रातभर मरीज को इसकी नली हाथ में ही लगाकर रखनी पड़ती है। यह खुलासा इस अस्पताल में भर्ती लोधीपुर निवासी बुखार से पीड़ित पिंकी व उसकी मां ने किया है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर भी उनको देखने वाला कोई नहीं होता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि बिना जांच के जिला अस्पताल में सभी प्रकार के बुखारों की एक ही दवा दी जा रही है। यहां से मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए नहीं भेजे जा रहे हैं। हालांकि सीएचसी प्रशासन सैंपल भेजने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मरीज इसको झूठा बता रहे हैं।
जिला अस्पताल के वार्ड में सबसे ज्यादा डीएम के गोद लिए गांव ट्याला के मरीज भर्ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गंदगी के कारण बुखार फैल रहा है। बुधवार को वार्ड में 21 वर्षीय मोहम्मद शहजाब, 55 वर्षीय कमरजहां, 35 वर्षीय अफसाना, 19 वर्षीय दानिश भर्ती था।
सीएमओ डा.एके सिंह का कहना है कि सीएचसी के चिकित्सक, कर्मचारियों को मरीजों की देखरेख के कड़े निर्देश दिए हुए हैं। वह स्वयं अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों से बातचीत करेंगे। लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।