कारोबारियों का कहना है कि लोकतंत्र में वोट का अधिकार ही सर्वोपरि है, इसके द्वारा सत्ता से लेकर व्यवस्था तक का बदलाव संभव है। जाति-धर्म की भावना में बहकर वोट देने से किसी समस्या का निराकरण संभव नहीं है। इस नाम पर अयोग्य प्रत्याशी जीत हासिल कर लेते हैं, जो विकास की बजाए अपने खुद के विकास में लग जाते हैं।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष मूलचंद सिंघल कहते हैं कि व्यापारी वर्ग को जागरूक होकर समाजहित में वोट करना होगा। किसी भावना में बहना घातक है। जिससे अन्य वर्ग पथ भ्रमित हो जाते हैं। हर एक को शपथ लेकर अपना वोट डालना होगा।
सिंभावली के जूता कारोबारी ब्रजेश गर्ग का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए उद्योग-धंधों की स्थापना बेहद जरूरी है। परंतु अभी तक इस तरफ कोई तवज्जोह नहीं दी जा सकी है, जिससे क्षेत्र लगातार पिछड़ता जा रहा है।
योग्य, ईमानदार, शिक्षित और कर्मठ प्रत्याशी को जिताने के लिए सभी को जागरूक होकर मतदान करना होगा। सिंभावली के कपड़ा व्यापारी कहते हैं कि दलगत भावना का पालन करना तो ठीक है, लेकिन इस नाम पर अयोग्य प्रत्याशी को वोट देना सरासर गलत है।
पार्टियों को भी प्रत्याशी थोपने की बजाए लोगों की पसंद को अवश्य ही ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए पार्टियों की मनमानी को रोकने को हर किसी को वोट की ताकत दिखानी होगी।
व्यापारी कमलेश शर्मा का कहना है कि कानून में संशोधन कर वोटिंग को अनिवार्य किया जाए। जब हर कोई वोट डालेगा तो फिर बाद में विजयी प्रत्याशी से कोई गिला शिकवा रखना मुनासिब नहीं रहेगा। वोटिंग अनिवार्य होने तक कारोबारी वर्ग जागरूक होकर अशिक्षित और पथ भ्रमित तबके को भी वोटिंग का महत्व बताए।