नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है लेकिन चीनी मिलें अब भी जिले के गन्ना किसानों के 168 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। ऐसे में आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों की दीपावली इस बार भी फीकी रहने के आसार हैं।
जिले के अधिकतर किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। इनकी सभी छोटी और बड़ी जरूरतें गन्ना भुगतान से ही पूरी होती हैं। ऐसे में अब तक गन्ना भुगतान न होने से किसान बदहाल हो गए हैं।
अब भी किसानों के सिंभावली शुगर मिल पर 127 करोड़ व ब्रजनाथपुर शुगर मिल पर 41 करोड़ रुपये बकाया हैं। सिंभावली चीनी मिल ने नया पेराई सत्र शुरू कर किसानों से फिर उधार में गन्ना खरीदना शुरू कर दिया है।
इस मामले में जिला गन्ना अधिकारी नम्रता कश्यप ने कहा कि शुगर मिल पर भुगतान के लिए पूरा दबाव बनाया जा रहा है। दोनों मिलों ने 30 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच पूरा भुगतान करने का आश्वासन दिया है।
किसान की किसी सरकार को चिंता नहीं है। गन्ना किसान की मुख्य फसल है और हर बार इसी का भुगतान अटका रहता है। इस बार की दीपावली पूरी तरह से फीकी रहेगी। बलजीत सिंह, किसान, सलारपुर
शुगर मिलों ने किसान की इतनी दुर्गति कर दी है कि अब उन्हें कोई उधार भी देने को तैयार नहीं है। दीपावली मनाना तो दूर किसान आत्महत्या करने की कगार पर खड़े हैं। नरेंद्र सहवाग, किसान, श्यामपुर
गन्ना मूल्य का भुगतान न होने के कारण किसानों के पास दीपावली पर मिठाई खरीदने के भी पैसे नहीं हैं। नए कपड़े या मिलने-जुलने वालों को उपहार देने की बात तो दूर है। जयबीर सिंह गुर्जर, किसान , दत्तियाना
भुगतान अटका होने के कारण हालात इतने बदतर हो गए हैं कि किसान दीपावली मनाने के लिए गन्ने को औने पौने दामों पर क्रेशरों पर बेचने को मजबूर हैं। रामकुमार आर्य, किसान, सलारपुर