तहसील क्षेत्र में आलू की बंपर पैदावार अब किसानों के लिए आफत बन गई है। अधिकांश शीतगृहों पर हाउस फुल के बोर्ड लग गए हैं। जबकि, भंडारण के लिए आलू से लदी सैकड़ों ट्रॉलियां शीतगृहों के बाहर खड़ी हैं। उधर, खेतों में खुदाई और छंटाई अभी भी जारी है।
बता दें कि इस सीजन में आलू की बंपर पैदावार हुई है। शीतगृहों मे रखा पुराना आलू नवंबर दिसंबर तक चलने के कारण कच्चे आलू की खुदाई भी कम हुई थी। इसका परिणाम है कि इस बार आलू की पैदावार पिछले साल के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत अधिक हुई है।
उधर, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब में भी आलू की फसल अच्छी होने के चलते मांग में कमी आई है, जिससे आलू के रेट लगभग 200 रुपये प्रति कट्टा चल रहे हैं। ऐेसे में आलू बेचने पर किसानों को लागत भी हाथ नहीं आ रही है।
अधिकांश किसान खुदाई के बाद आलू शीतगृहों में रखते गए। अभी कम से कम पांच लाख कट्टा आलू शीतगृहों से बाहर पड़ा है। जबकि, अधिकांश शीतगृहों पर हाउस फुल के बोर्ड लग गए हैं। किसानों का कहना है कि पछेता आलू तो अभी खुदा नहीं है,
जिसके भंडारण को लेकर किसान चिंतित है। हालात यह है कि किसान आलू से लदी ट्रॉलियां कभी किसी शीतगृह पर तो कभी किसी शीतगृह पर ले जाते हैं और वहां हाउस फुल का बोर्ड देखकर लौट जाते हैं।