हापुड़। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के विद्वानों ने बैठक में होलिका दहन तीन मार्च को सुबह 5:39 बजे से 6:19 बजे के बीच करने का निर्णय लिया। वहीं रंगों का पर्व होली चार मार्च को मनाया जाएगा।
महासभा के अध्यक्ष पंडित केसी पांडेय ने बताया कि पूर्णिमा तिथि दो मार्च को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर तीन मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगा। लेकिन दो मार्च को शाम 5:55 बजे पर पृथ्वीलोक की अशुभ भद्रा के साथ पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होने से होलिका दहन नहीं किया जा सकता। तीन मार्च को दोपहर 3:20 बजे भारत में दृश्य चंद्रग्रहण लगने से सूतक भी तीन मार्च को सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा, इसलिए होलिका दहन तीन मार्च को सूर्योदय से पूर्व किया जाएगा।
महासभा संरक्षक डॉ. वासुदेव शर्मा ने बताया कि धर्मग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि भद्रा काल और ग्रहण में होलिका दहन करना अशुभ होता है। शास्त्रों में होलिका दहन के समय भद्रा हो तो अशुभ कहा गया है। परामर्श मण्डल विद्वान पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि होलिका दहन के लिए तीन मार्च की सुबह 5:29 बजे से 6:19 बजे तक 50 मिनट का शास्त्र सम्मत सही समय है। होलिका पूजन रात्रि 8:15 बजे से होगा।
मंत्री आचार्य देवी प्रसाद तिवारी व कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले ने बताया कि इस बार विशेष परिस्थिति होने के कारण होलिका पूजन भद्रामुख छोड़कर रात्रि 8:15 के बाद मघा नक्षत्र व सुकर्मा योग में किया जाएगा। तीन मार्च की सुबह चार बजे से 5:30 बजे तक पूजन करना अधिक शुभ रहेगा। स्नान, दान की पूर्णिमा भी तीन मार्च को रहेगा।
बैठक में ओमप्रकाश पोखरियाल, अखिलेश शर्मा, हरीश शर्मा, अजय पाण्डेय, अमर प्रकाश पांडेय, आशीष पोखरियाल, उमेश शर्मा, शैलेंद्र मिश्रा शास्त्री, अजय त्रिपाठी, जयप्रकाश त्रिवेदी, दीपक तिवारी, राहुल शर्मा, अनिशा सोनी पांडेय, पूजा, गौरव कौशिक आदि मौजूद रहे।